भारत में बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच, अकेले रहने वाले लोग अब भावनात्मक और व्यावहारिक सहारे के लिए मिलकर रहने के तरीके खोज रहे हैं। यह ट्रेंड अब हकीकत बनता दिख रहा है, जहाँ कुछ सदस्यों ने अकेलेपन से बचने के लिए महाराष्ट्र के तलेगांव के पास साझा घरों में निवेश भी कर दिया है।
बदलती सामाजिक व्यवस्था और रिटायरमेंट की प्लानिंग
भारत में सामाजिक ढांचा तेजी से बदल रहा है, जिसके चलते सिंगल लोगों के लिए लाइफस्टाइल के नए विकल्प सामने आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2036 तक भारत में बुजुर्गों की आबादी करीब 230 मिलियन तक पहुंच जाएगी। ऐसे में, अकेले बुढ़ापा बिताने की चिंता लोगों को कम्युनिटी-आधारित लिविंग की ओर धकेल रही है। पारंपरिक पारिवारिक संरचनाओं पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, कई लोग अब साझा (shared) घर के मॉडल्स तलाश रहे हैं ताकि रिटायरमेंट के बाद सुरक्षा, साथ और आपसी सहयोग सुनिश्चित हो सके।
'JOY' और कम्युनिटी-लेड हाउसिंग मॉडल
इसी दिशा में एक पहल है 'JOY' (Just Older Youth), जिसे निषी विज़ मल्होत्रा ने शुरू किया है। यह ग्रुप 55 से 65 साल की उम्र के लोगों पर फोकस करता है। इसका मुख्य मकसद अकेले रहने की चुनौतियों से निपटने के लिए लोगों को एक-दूसरे के करीब रिटायरमेंट लिविंग अरेंजमेंट्स में व्यवस्थित करना है। साथ मिलकर रहने की इस सोच से सदस्य अपने संसाधनों को जोड़ सकते हैं और एक-दूसरे को भावनात्मक व व्यावहारिक मदद दे सकते हैं। इस मॉडल की प्रभावशीलता तब दिख रही है जब 11 सदस्यों के एक ग्रुप ने महाराष्ट्र के तलेगांव के पास एक हाउसिंग डेवलपमेंट में पहले से ही रेसिडेंशियल फ्लैट्स खरीद लिए हैं।
सपोर्ट नेटवर्क्स का बढ़ता दायरा
रिटायरमेंट प्लानिंग से आगे बढ़कर, सिंगल लोगों के लिए सपोर्ट नेटवर्क्स पिछले कुछ सालों में काफी बढ़े हैं। लैला ज़फ़र द्वारा 2019 में शुरू किया गया 'The Village for Single Parents' इसी ट्रेंड का एक अलग पहलू दिखाता है। शुरुआत में यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म था जो पेरेंट्स को सेफ्टी एडवाइस और पैरेंटिंग टिप्स देता था। COVID-19 महामारी के दौरान यह नेटवर्क तेजी से बढ़ा और अब दुनिया भर में 15,000 से ज्यादा सदस्यों को सपोर्ट करता है। ये डिजिटल-फर्स्ट कम्युनिटी अक्सर पारंपरिक सपोर्ट सिस्टम की कमी को पूरा करती हैं और हेल्थकेयर व चाइल्डकेयर मैनेजमेंट जैसी रोजमर्रा की चुनौतियों में जरूरी मदद पहुंचाती हैं।
भविष्य की अर्बन प्लानिंग के लिए संकेत
शेयर्ड लिविंग और कम्युनिटी नेटवर्क्स की यह बढ़ती प्राथमिकता, सिंगल लोगों द्वारा अर्बन हाउसिंग को देखने के नजरिए में एक बदलाव का संकेत देती है। भले ही ये पहलें अभी छोटे स्तर पर कम्युनिटी-लीड तरीके से चल रही हैं, लेकिन ये खास सीनियर लिविंग सॉल्यूशंस की व्यापक मांग को दर्शाती हैं। निवेशकों और डेवलपर्स के लिए, यह ट्रेंड ऐसे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एक संभावित बाजार का संकेत देता है जो कम्युनल स्पेस, शेयर्ड फैसिलिटीज और इंटीग्रेटेड सपोर्ट सर्विसेज पर जोर देते हैं, न कि केवल व्यक्तिगत यूनिट्स पर। इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे शेयर्ड प्रॉपर्टी ओनरशिप के लिए कानूनी ढांचे को कैसे औपचारिक रूप देते हैं और जैसे-जैसे सदस्य समूह की उम्र बढ़ेगी, उन्हें प्रोफेशनल हेल्थकेयर और मैनेजमेंट सर्विसेज के साथ कैसे जोड़ा जाता है।
