भारत में रहने वाले उन लोगों के लिए बड़ी खबर है जो विदेश में संपत्ति रखते हैं। अब आपको अपनी सभी विदेशी संपत्ति और आय का खुलासा इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में करना अनिवार्य होगा, वरना ₹10 लाख तक का भारी जुर्माना लग सकता है।
क्या हैं नए नियम?
भारत में रहने वाले और सामान्य रूप से निवासी (Resident and Ordinarily Resident - ROR) टैक्सपेयर्स के लिए अब विदेश में कमाई गई आय और संपत्ति की जानकारी देना पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। अगर आपके पास विदेशी बैंक अकाउंट, शेयर, रिटायरमेंट फंड या ESOPs हैं, तो आपको इसकी जानकारी अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में देनी ही होगी। ज़रा सी चूक, यानी किसी एक संपत्ति का भी खुलासा न करने पर, ब्लैक मनी (Undisclosed Foreign Income and Assets) एक्ट के तहत ₹10 लाख प्रति मामले तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, भले ही उससे कोई टैक्सेबल इनकम न हो रही हो।
ITR फॉर्म और रिपोर्टिंग की अवधि
जिन टैक्सपेयर्स के पास विदेशी संपत्ति या आय है, वे अब ITR-1 जैसे सरल फॉर्म का उपयोग नहीं कर पाएंगे। उन्हें अपनी आय के स्रोत के आधार पर ITR-2 या ITR-3 फॉर्म भरना होगा। इन फॉर्म्स में 'शेड्यूल FA' नाम का एक खास सेक्शन होता है, जहाँ सभी विदेशी संपत्तियों की लिस्ट देनी होती है। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में फाइनेंशियल ईयर (अप्रैल-मार्च) होता है, लेकिन शेड्यूल FA में संपत्ति का ब्यौरा कैलेंडर ईयर (जनवरी-दिसंबर) के हिसाब से देना होता है। यानी, असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए, आपको 1 जनवरी, 2025 से 31 दिसंबर, 2025 तक की अवधि में रखी गई संपत्तियों का विवरण देना होगा।
ग्लोबल इनकम और डबल टैक्सेशन
ROR व्यक्तियों के लिए, भारत सिर्फ देश के अंदर की ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की आय पर टैक्स लगाता है। इसमें विदेशी सैलरी, प्रॉपर्टी या अन्य स्रोतों से होने वाली कमाई शामिल है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, इन विदेशी संपत्तियों को उन इनकम शेड्यूल से जोड़ना ज़रूरी है जहाँ उस आय को घोषित किया गया है। कई बार ऐसा होता है कि एक ही आय पर विदेशी देश और भारत, दोनों जगह टैक्स देना पड़ता है। इससे बचने के लिए, सरकार डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट्स (DTAA) के तहत फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) का दावा करने की अनुमति देती है। इसके लिए, आपको विदेशी आय और उस पर चुकाए गए टैक्स की जानकारी संबंधित ITR शेड्यूल और शेड्यूल TR में देनी होगी।
कंप्लायंस और सटीकता का प्रबंधन
इस भारी जुर्माने को देखते हुए, टैक्स डिपार्टमेंट पूरी सटीकता की उम्मीद करता है। टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने रिकॉर्ड्स को विदेशी ब्रोकरेज फर्मों और बैंकों से मिले स्टेटमेंट्स से मिलाएं। विदेशी करेंसी को भारतीय रुपये में बदलने के लिए, सरकार भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की टेलीग्राफिक ट्रांसफर बाइंग रेट का इस्तेमाल करने का निर्देश देती है। अगर आपकी रिपोर्ट की गई विदेशी आय और शेड्यूल FA में दी गई जानकारी में कोई अंतर पाया जाता है, तो टैक्स अधिकारी जांच शुरू कर सकते हैं। इसलिए, विदेश में संपत्ति रखने वाले निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे फाइलिंग की आखिरी तारीख से पहले सभी विवरणों को अच्छी तरह से जांच लें।
