Nepal Flood Crisis: हाइड्रोपावर सेक्टर पर बड़ा संकट, 431 MW बिजली उत्पादन ठप

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nepal Flood Crisis: हाइड्रोपावर सेक्टर पर बड़ा संकट, 431 MW बिजली उत्पादन ठप

नेपाल के Bhote Koshi नदी बेसिन में बने एक अस्थिर बैरियर लेक (Barrier Lake) के कारण भारी अलर्ट जारी किया गया है। फ्लैश फ्लड के चलते 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा है, जिससे नेशनल ग्रिड से **431 MW** से ज्यादा की बिजली कट गई है। इसका असर Nepal Stock Exchange (NEPSE) में साफ दिख रहा है।

नेपाल का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर इस समय गंभीर संकट में है। 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ के बाद तिब्बत सीमा के पास एक अस्थिर बैरियर लेक के निर्माण ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। अधिकारियों ने Bhote Koshi और Trishuli नदी के आसपास के इलाकों के लिए हाई-अलर्ट जारी किया है। ताजा अनुमानों के मुताबिक, वहां लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा है, और अगले 72 घंटों में 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी जमा होने की आशंका जताई गई है।

बिजली सेक्टर पर असर

इसका सीधा असर देश के पावर सेक्टर पर पड़ा है। 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और 1 सोलर प्लांट ग्रिड से बाहर हो गए हैं, जिससे 431.1 MW का बिजली उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया है। Rasuwagadhi, Sanjen और Chilime जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को काफी नुकसान हुआ है, जिससे भविष्य के रेवेन्यू पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

मार्केट का रिएक्शन

NEPSE में गिरावट का सिलसिला तेज हो गया है। सबसे ज्यादा दबाव हाइड्रोपावर और नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में देखने को मिल रहा है। यह घटना हिमालयी क्षेत्र में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स के रिस्क को उजागर करती है, जहां क्लाइमेट-रिलेटेड घटनाएं अचानक भारी तबाही मचा सकती हैं।

अभी स्थिति नाजुक है और प्रशासन नेचुरल डैम की स्थिरता पर नजर रखे हुए है। निवेशकों को सलाह है कि वे उन कंपनियों के रिस्टोरेशन टाइमलाइन (Restoration Timelines) पर नजर रखें, क्योंकि यही कंपनी के शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल परफॉरमेंस को तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.