Nepal Avalanche: कुदरती आपदा से नेपाल में मची तबाही, हाइड्रोपावर सेक्टर पर बढ़े संकट के बादल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Nepal Avalanche: कुदरती आपदा से नेपाल में मची तबाही, हाइड्रोपावर सेक्टर पर बढ़े संकट के बादल

नेपाल के रसुवा जिले में हाल ही में आए बर्फीले एवलांच (Avalanche) ने भीषण बाढ़ का रूप ले लिया है। इस तबाही ने बुनियादी ढांचे के साथ-साथ कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भी प्रभावित किया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

तबाही की जड़: क्या हुआ रसुवा में?

26 अगस्त को रसुवा जिले के लेंड ख्रोला क्षेत्र में एक विशाल आइस-रॉक एवलांच (Ice-rock avalanche) आया, जिसने भोटे कोसी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में भीषण बाढ़ पैदा कर दी। ICIMOD के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मलबे और पानी का सैलाब इतनी तेजी से आया कि गलछी स्टेशन पर महज 30 मिनट के भीतर जलस्तर 9 मीटर तक ऊपर चढ़ गया।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और हाइड्रोपावर पर असर

इस आपदा ने सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया है। हिमालयी इलाकों में स्थित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल और एग्जीक्यूशन रिस्क बन गया है। प्लांट की मशीनों को नुकसान, वाटर इनटेक सिस्टम में मलबे का जमाव और संपर्क मार्गों का टूटना लंबी अवधि के आउटेज (Outage) का कारण बन सकता है, जिससे कंपनियों का अनपेक्षित कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है क्योंकि नदियों के संकरे रास्तों पर लैंडस्लाइड से बांध बनने का खतरा बना है। अगर मलबा अचानक हटता है, तो एक और लहर आ सकती है। निवेशक अब प्रोजेक्ट्स में देरी, बढ़ती इंश्योरेंस लागत और डिजास्टर-रेसिस्टेंट इंजीनियरिंग की सख्त सरकारी गाइडलाइंस पर नजर बनाए हुए हैं। यह घटना हिंदू-कुश हिमालय क्षेत्र में जलवायु जोखिमों (Climate hazards) को भी उजागर करती है, जो भविष्य के निवेश के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.