Maharashtra Pollution Control Board ने नासिक के अंबड इंडस्ट्रियल एरिया में 17 इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट्स को तुरंत बंद करने का आदेश दिया है। ग्राउंडवॉटर में क्रोमियम का स्तर सुरक्षित सीमा से **1,000 गुना** ज्यादा पाया गया है, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
Maharashtra Pollution Control Board (MPCB) की जांच में नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र में खौफनाक खुलासे हुए हैं। लैब टेस्ट में हेक्सावेलेंट क्रोमियम का स्तर 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जबकि Bureau of Indian Standards (BIS) की सुरक्षित सीमा मात्र 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर है। इस गंभीर उल्लंघन पर बोर्ड ने तुरंत प्रभाव से इन 17 इकाइयों की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी है।
पब्लिक हेल्थ और पर्यावरण को खतरा
यह प्रदूषण सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। दत्तानगर इलाके के 100 से ज्यादा निवासियों में त्वचा संबंधी बीमारियां जैसे रैशेज और अल्सर की शिकायतें सामने आई हैं, जो प्रदूषित भूजल के इस्तेमाल से जुड़ी हैं। खतरनाक रसायनों का यह रिसाव नंदिनी नदी तक पहुंच चुका है, जो गोदावरी की सहायक नदी है। यह 2027 के कुंभ मेले से पहले जल गुणवत्ता पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
इंडस्ट्री के लिए सबक
यह घटना महाराष्ट्र के सभी औद्योगिक क्लस्टर के लिए एक चेतावनी है। पर्यावरण संबंधी सख्त नियमों (ESG compliance) के कारण अब मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए अनुपालन लागत बढ़ने वाली है। कंपनियों को अब एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम में बड़ा कैपिटल खर्च करना होगा। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि पर्यावरण संबंधी लापरवाही किसी भी व्यवसाय को रातों-रात बंद करवा सकती है और उनकी प्रतिष्ठा व मुनाफे को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
