Narnolia Financial Services के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) शैलेन्द्र कुमार को अगले दो सालों में भारतीय शेयर बाज़ार में जोरदार तेज़ी दिखने की उम्मीद है। उनका अनुमान है कि **2026** से **2028** के बीच कंपनियों की कमाई (Earnings) में औसतन **17%** की सालाना ग्रोथ दर्ज की जाएगी। हालांकि, उन्होंने कुछ प्रमुख जोखिमों के प्रति आगाह भी किया है।
अगले 2 साल बाज़ार के लिए कैसे रहेंगे?
Narnolia Financial Services के CIO, शैलेन्द्र कुमार का मानना है कि भारतीय शेयर बाज़ार में अगले दो वर्षों तक तेज़ी का दौर जारी रह सकता है। यह अनुमान कॉरपोरेट कमाई में सुधर पर आधारित है, जिसके 2026 से 2028 फाइनेंशियल ईयर के बीच 17% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है। गौरतलब है कि इससे पहले यह ग्रोथ लगभग 5% तक सीमित थी। शैलेन्द्र कुमार का अनुमान है कि FY27 में कमाई 15% और FY28 में 19% तक बढ़ सकती है, जिससे बाज़ार में वैल्यूएशन मल्टीपल्स (Valuation Multiples) के बढ़ने की संभावना है।
कंजम्पशन और IT सेक्टर पर क्या है राय?
ओवरऑल तेज़ी के अनुमान के बावजूद, कंजम्पशन सेक्टर का भविष्य मिला-जुला दिख रहा है। उम्मीद है कि भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ मुख्य रूप से इन्वेस्टमेंट पर निर्भर रहेगी, जिसमें सरकारी खर्च और प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर (Private Capital Expenditure) का बड़ा योगदान होगा। कंजम्पशन स्पेस में ऑटोमोबाइल, मजबूत रिटेल प्रेज़ेंस वाले बैंक और कुछ खास कंज्यूमर सर्विसेज़ पर फोकस रहेगा। वहीं, कंज्यूमर स्टेपल्स (Consumer Staples) और पारंपरिक ड्यूरेबल्स (Traditional Durables) पर थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह है, क्योंकि इनमें नज़दीकी भविष्य में कमाई पर दबाव रह सकता है।
IT सेक्टर के लिए, एंटरप्राइज AI कस्टमाइज़ेशन (Enterprise AI Customization) एक महत्वपूर्ण लॉन्ग-टर्म फैक्टर है। यह स्ट्रक्चरल बदलाव करीब 20-30% लेगेसी रेवेन्यू स्ट्रीम्स (Legacy Revenue Streams) को प्रभावित कर रहा है, और यह 2027 तक जारी रहने की उम्मीद है। IT स्टॉक्स में छोटी अवधि की तेज़ी दिख सकती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस कंपनियों के AI इंटीग्रेशन (AI Integration) के प्रति अपने बिज़नेस मॉडल्स को अपनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
PSU पर सरकारी रणनीति
पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) को लेकर सरकार के रुख में बदलाव आया है। Q1FY27 में बड़े डिसइन्वेस्टमेंट (Divestment) के बाद, एनर्जी प्राइसेज़ (Energy Prices) के सामान्य होने पर स्टेक सेल (Stake Sale) की ज़रूरत कम हो सकती है। सरकार आक्रामक विनिवेश (Privatization) के बजाय PSUs के इंट्रिन्सिक वैल्यू (Intrinsic Value) को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, सिवाय IDBI Bank जैसी कुछ चुनिंदा कंपनियों के।
बाज़ार के लिए प्रमुख जोखिम
यह बुलिश आउटलुक (Bullish Outlook) जारी रहने वाली ग्रोथ की धारणा पर आधारित है, लेकिन चार प्रमुख जोखिमों की पहचान की गई है जो बाज़ार की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें US फेडरल रिज़र्व (US Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े ग्लोबल इन्वेस्टमेंट में संभावित मंदी, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) या ट्रेड टैरिफ (Trade Tariff) का बढ़ना, और गंभीर अल नीनो (El Niño) घटना का मौसम पर प्रभाव शामिल है। फिलहाल इन जोखिमों को मैनेजेबल (Manageable) माना जा रहा है, लेकिन अगर ये बढ़ते हैं तो पोर्टफोलियो प्रदर्शन पर दबाव डाल सकते हैं। निवेशकों को इन मैक्रो फैक्टर्स (Macro Factors) पर नज़र रखनी होगी, क्योंकि ये आने वाली तिमाहियों में ग्लोबल लिक्विडिटी (Global Liquidity) और कॉर्पोरेट कॉस्ट स्ट्रक्चर्स (Corporate Cost Structures) को प्रभावित कर सकते हैं।
