4 अगस्त, 2026 को हुए Marine One के नियर-मिस मामले में NTSB ने व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण कार्य को जिम्मेदार ठहराया है। सिग्नल में बाधा आने के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को उड़ान की सूचना नहीं मिल सकी थी, जिससे दो विमानों के बीच टकराव का खतरा पैदा हो गया।
हादसे की असल वजह
NTSB की ताजा जांच रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस परिसर में चल रहे निर्माण कार्य के कारण Marine One को अपनी टेकऑफ लोकेशन को अस्थायी रूप से 'द एलिप्स' (The Ellipse) पर शिफ्ट करना पड़ा था। इस बदलाव के कारण एक रेडियो 'लाइन-ऑफ-साइट' रुकावट पैदा हो गई, जिससे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को 3 मिनट पहले मिलने वाली अनिवार्य डिपार्चर सूचना नहीं मिल सकी। इस कम्युनिकेशन फेल्योर के चलते, अधिकारियों ने अनजाने में उसी फ्लाइट पाथ पर एक Envoy Air जेट को टेकऑफ की अनुमति दे दी थी।
कैसे टला खतरा?
जब विमान एक-दूसरे के करीब पहुंचे, तो कमर्शियल जेट के 'कॉकपिट ट्रैफिक कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम' ने पायलटों को सतर्क कर दिया। इसके बाद Marine One के पायलटों ने जेट को देखते ही होवर (हवा में स्थिर) कर दूरी बनाई। दोनों विमानों के बीच सबसे कम दूरी महज 0.8 मील लेटरल और 700 फीट वर्टिकल रह गई थी। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और इसे 'मोमेंटरी लॉस ऑफ सेपरेशन' के रूप में दर्ज किया गया।
FAA का एक्शन प्लान
इस घटना के बाद, Federal Aviation Administration (FAA) ने तुरंत सुरक्षा कदम उठाए हैं। भविष्य में ऐसी तकनीकी बाधाओं को रोकने के लिए, रेडियो रिसीवर इंफ्रास्ट्रक्चर को एयरपोर्ट कंट्रोल टावर के सबसे ऊपरी हिस्से में शिफ्ट कर दिया गया है। पोस्ट-इंसीडेंट टेस्टिंग में पुष्टि हुई है कि इस अपग्रेड से डिपार्चर कोऑर्डिनेशन के लिए सिग्नल की गुणवत्ता पूरी तरह बहाल हो गई है।
