NEET पेपर लीक मामला: NTA ने 47 कर्मचारियों को निकाला, जांच तेज

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AuthorAditya Rao|Published at:
NEET पेपर लीक मामला: NTA ने 47 कर्मचारियों को निकाला, जांच तेज

NEET परीक्षा में हुए पेपर लीक कांड के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बड़ा एक्शन लिया है। एजेंसी ने **47** अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया है। यह फैसला छात्रों के भारी विरोध और परीक्षा प्रक्रिया में खामियों को लेकर बढ़ते दबाव के बीच आया है।

Detailed Coverage

47 अधिकारी नौकरी से बाहर

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने शुक्रवार को NEET परीक्षा में हुए पेपर लीक की घटनाओं के चलते 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। इस कार्रवाई के साथ ही, एजेंसी परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से जुड़े कुछ खास लोगों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी शुरू कर रही है। यह कदम सरकार द्वारा परीक्षा कराने वाली इस संस्था में सुधार लाने के प्रयासों का एक अहम हिस्सा है, जिस पर राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

स्टाफ की कमी और बाहरी मदद पर निर्भरता

साल 2018 में स्थापित NTA, जो एक स्वायत्त संस्था है, वर्तमान में स्थायी कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, एजेंसी में 56% से अधिक की वैकेंसी दर है। 55 स्वीकृत स्थायी पदों में से केवल 24 पद भरे हुए हैं। इस कमी के चलते एजेंसी को हाई-प्रोफाइल राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन के लिए काफी हद तक अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है।

इन ऑपरेशनल गैप्स को भरने के लिए, NTA वर्तमान में 73 कांट्रैक्ट वाले स्टाफ सदस्यों और 124 आउटसोर्स पर्सनल के साथ काम कर रही है। ये बाहरी कर्मचारी डेटा विश्लेषण, कम्युनिकेशन मैनेजमेंट से लेकर एडमिनिस्ट्रेटिव सपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। परीक्षाओं के दौरान, यह संख्या और भी बढ़ जाती है, जिसमें राज्य सरकारों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के हजारों बाहरी लोगों के साथ समन्वय की आवश्यकता होती है।

वित्तीय ग्रोथ और भविष्य की चुनौतियां

लगातार विवादों और ऑपरेशनल मुश्किलों के बावजूद, NTA ने पिछले कुछ सालों में तेजी से वित्तीय ग्रोथ दर्ज की है। फाइनेंशियल ईयर 2019-20 और 2023-24 के बीच, एजेंसी की सालाना आय दोगुनी से अधिक हो गई है। खर्चों में भी इसी तरह की वृद्धि देखी गई है, जिसमें 2023-24 फाइनेंशियल ईयर में कुल व्यय ₹1,000 करोड़ के पार पहुंच गया।

स्टेकहोल्डर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह देखना होगी कि क्या कर्मचारियों को हटाने और ये स्ट्रक्चरल बदलाव परीक्षा प्रक्रियाओं को अधिक स्थिर और सुरक्षित बना पाते हैं। विश्लेषक और निवेशक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि क्या शिक्षा मंत्रालय स्थायी पदों को भरने के लिए और कदम उठाता है, क्योंकि आउटसोर्स और कांट्रैक्ट लेबर पर लगातार निर्भरता एजेंसी के लंबे समय के गवर्नेंस और ऑपरेशनल विश्वसनीयता के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.