NEET परीक्षा में बायोमेट्रिक सुरक्षा में सेंध: NTA पर उठे सवाल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
NEET परीक्षा में बायोमेट्रिक सुरक्षा में सेंध: NTA पर उठे सवाल

NEET-UG की दोबारा परीक्षा के दौरान 18 बायोमेट्रिक स्टाफ की गिरफ्तारी के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर जांच के घेरे में है। पता चला है कि NTA ने सुरक्षा का जिम्मा सरकारी कंपनी EdCIL को दिया था, जिसने आगे एक ऐसी सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी को हायर किया जो कई राज्यों में ब्लैकलिस्टेड थी। यह घटना सरकारी परीक्षा सुरक्षा ढांचे में जवाबदेही की गंभीर कमी को उजागर करती है और भविष्य में कड़ी जांच प्रक्रियाओं की ओर इशारा करती है।

बायोमेट्रिक सुरक्षा में चूक, 18 गिरफ्तार!

बिहार में NEET-UG की दोबारा हुई परीक्षा के दौरान 18 बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन स्टाफ की गिरफ्तारी के बाद NTA पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर से सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय पुलिस ने कुल 30 लोगों को हिरासत में लिया है, जो यह बताते हैं कि कैसे हाई-प्रोफाइल एंट्रेंस एग्जाम की ग्राउंड लेवल पर मैनेजमेंट में बड़ी खामियां हैं।

आउटसोर्सिंग चेन और जवाबदेही का सवाल

जांच से NTA के आउटसोर्सिंग मॉडल पर भी सवाल उठ रहे हैं। RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, NTA सीधे बायोमेट्रिक सिक्योरिटी टीमों को मैनेज नहीं करता। इसके बजाय, यह सरकारी कंपनी EdCIL (India) Limited को यह प्रक्रिया संभालने के लिए नियुक्त करता है। EdCIL ने आगे यह काम Innovative View नाम की एक प्राइवेट फर्म को सब-कॉन्ट्रैक्ट पर दिया। पब्लिक रिकॉर्ड्स और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सब-कॉन्ट्रैक्टर फर्म उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और झारखंड जैसे राज्यों में पहले से ब्लैकलिस्टेड थी। इससे इस बात पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं कि एजेंसियों ने किन ड्यू-डिलिजेंस प्रक्रियाओं का पालन किया।

NTA का कहना है कि उनका समझौता केवल EdCIL के साथ है और वे सीधे तौर पर थर्ड-पार्टी सब-कॉन्ट्रैक्टर की जांच नहीं करते। हालांकि, इस दलील का हितधारकों ने विरोध किया है, उनका कहना है कि परीक्षा की इंटीग्रिटी के लिए अंततः NTA ही जिम्मेदार होना चाहिए, चाहे सब-कॉन्ट्रैक्टिंग का स्ट्रक्चर कुछ भी हो।

गवर्नेंस और ऑपरेशनल रिस्क

यह बायोमेट्रिक सुरक्षा में विफलता एजेंसी के लिए चुनौतियों की एक लंबी लिस्ट में सबसे नया मामला है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की एक अलग जांच में NTA द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों सहित 13 लोगों के खिलाफ पेपर लीक के एक अलग मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है। सुरक्षा संबंधी इन लगातार घटनाओं ने परीक्षा निकाय के लिए महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और रेपुटेशनल रिस्क पैदा कर दिया है।

जनता का भरोसा बहाल करने के लिए, NTA ने अपने सुरक्षा ढांचे को सुधारने के कदम उठाए हैं। एजेंसी ने अपनी सुविधाओं पर सुरक्षा सेवाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से ₹7.5 करोड़ के नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की है।

शिक्षा और परीक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह घटना सरकारी खरीद नीतियों में बदलाव लाएगी। वेंडर क्रेडेंशियल्स की कड़ी जांच, सब-कॉन्ट्रैक्टिंग पर रेगुलेटरी कैप और सुरक्षा के लिए बढ़ी हुई ऑपरेशनल लागत, ये सभी संभावनाएं हैं क्योंकि सरकार भविष्य में ऐसी सेंधमारी को रोकने की कोशिश कर रही है। एजेंसी की संस्थागत विश्वास बहाल करने की क्षमता और नए सुरक्षा टेंडर को सफलतापूर्वक लागू करना आने वाली तिमाहियों में सबसे महत्वपूर्ण देखने लायक बातें होंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.