नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने देश भर के 70 मेडिकल कॉलेजों को CCTV सिस्टम को सेंट्रल कमांड सेंटर से न जोड़ने पर सख्त नोटिस जारी किया है। यह नियमों का उल्लंघन है, जिससे पारदर्शिता और मानकों पर सवाल उठ रहे हैं। इन संस्थानों को जल्द से जल्द तकनीकी खामियां दूर करनी होंगी, नहीं तो कार्रवाई हो सकती है।
NMC का एक्शन: 70 मेडिकल कॉलेजों पर गिरी गाज!
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने भारत भर के 70 अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कॉलेजों पर नकेल कसी है। इन कॉलेजों पर आरोप है कि वे अनिवार्य सर्विलांस नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। NMC ने साफ किया है कि इन संस्थानों ने अपने नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर्स (NVRs) को कमीशन के सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से सफलतापूर्वक कनेक्ट नहीं किया है, जबकि पहले भी इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके थे।
क्यों ज़रूरी हैं ये नियम?
यह कदम मेडिकल शिक्षा को मानकीकृत (Standardize) करने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है। ये नियम अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस (UGMSR) 2023, मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) रेगुलेशंस 2023, और पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस (PGMSR) 2023 के तहत आते हैं। इन नियमों के अनुसार, कॉलेजों को कैंपस की अहम जगहों पर कम से कम 25 CCTV कैमरे लगाने होंगे, NVR कनेक्टिविटी सुनिश्चित करनी होगी, और वीडियो रिकॉर्डिंग को कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखना होगा।
कहाँ हैं सबसे ज़्यादा डिफॉल्टर?
कमीशन द्वारा जारी सार्वजनिक नोटिस के मुताबिक, नियमों का पालन न करने वाले कॉलेज कई राज्यों में फैले हुए हैं। राजस्थान में सबसे ज़्यादा 13 कॉलेज इस मानक पर खरे नहीं उतरे हैं। इसके बाद महाराष्ट्र से 11 और दिल्ली से 8 डिफॉल्टिंग संस्थानों के नाम सामने आए हैं। दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉलेजों में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड डॉ. आरएमएल हॉस्पिटल का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है।
निवेशकों पर क्या असर?
हालांकि यह नोटिस सीधे तौर पर मेडिकल शिक्षा के लिए एक रेगुलेटरी मामला है, लेकिन यह बड़े संस्थानों में डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता पर बढ़ते जोर को दर्शाता है। सर्विलांस हार्डवेयर, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, या कैंपस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेशक और हितधारकों के लिए, यह घटना शिक्षा क्षेत्र में अनुपालन (Compliant) वाले तकनीकी समाधानों की बढ़ती मांग को रेखांकित करती है।
जो कॉलेज इन कमियों को दूर करने में विफल रहेंगे, उन्हें सीट विस्तार या नए कोर्स की मंजूरी में देरी जैसी और जांच का सामना करना पड़ सकता है। NMC ने डिफॉल्टिंग संस्थानों को तुरंत इन तकनीकी बाधाओं को दूर करने का निर्देश दिया है। साथ ही, जिन कॉलेजों को वास्तविक तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें समाधान के लिए कमीशन की आईटी टीम से समन्वय करने का रास्ता भी सुझाया गया है। अब देखना यह होगा कि क्या ये संस्थान समय पर नियमों का पालन करते हैं या NMC को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करनी पड़ती है।
