NITI Aayog का बड़ा प्लान: 2035 तक भारत की बायोइकोनॉमी होगी $691 अरब की, बनेंगे 3 करोड़ जॉब्स

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NITI Aayog का बड़ा प्लान: 2035 तक भारत की बायोइकोनॉमी होगी $691 अरब की, बनेंगे 3 करोड़ जॉब्स

सरकार ने भारत की बायोइकोनॉमी को 2035 तक $691 अरब तक पहुंचाने का रोडमैप लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य 3 करोड़ नौकरियां पैदा करना है। इस प्लान में छह राष्ट्रीय बायो-मिशन और स्टार्टअप इनोवेशन व कमर्शियल-स्केल प्रोडक्शन को सपोर्ट करने के लिए ₹50,000 करोड़ का नया ग्रोथ फंड प्रस्तावित है।

सरकार ने भारत को बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर में ग्लोबल लीडर बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति पेश की है। NITI Aayog के रोडमैप के अनुसार, देश की बायोइकोनॉमी का मूल्यांकन 2025 में अनुमानित $195.3 अरब से बढ़कर 2035 तक $691 अरब तक पहुंचने की उम्मीद है। इस बदलाव से देश के GDP में महत्वपूर्ण योगदान होने और हाई-स्किल्स वाले क्षेत्रों में 3 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

बायोटेक इकोसिस्टम को कैसे बढ़ाएंगे?

इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए, रणनीति बायोटेक्नोलॉजी को लैब रिसर्च से बड़े पैमाने पर कमर्शियल प्रोडक्शन तक ले जाने पर केंद्रित है। पॉलिसी का एक मुख्य हिस्सा ₹50,000 करोड़ के बायो-इकोनॉमी ग्रोथ फंड का प्रस्ताव है, जो 2026 से 2035 के बीच स्टार्टअप्स और फर्मों को कैपिटल प्रदान करेगा। इस फंडिंग का मकसद ऑपरेशंस को स्केल-अप करने की आम चुनौती को दूर करना है, जिसे अक्सर रिसर्च-हैवी स्टार्टअप्स के लिए 'वैली ऑफ डेथ' कहा जाता है, जहां इनोवेटिव प्रोडक्ट्स कमर्शियल फंडिंग की कमी के कारण मार्केट तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते हैं।

राष्ट्रीय बायो-मिशन और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

यह रोडमैप छह राष्ट्रीय बायो-मिशन पेश करता है जो सिंथेटिक बायोलॉजी, क्लाइमेट-रेसिलिएंट एग्रीकल्चर और नेक्स्ट-जेनरेशन बायोफार्मास्युटिकल्स जैसे विशिष्ट हाई-ग्रोथ वाले क्षेत्रों को टारगेट करते हैं। इन मिशनों का लक्ष्य रेगुलेटरी अप्रूवल्स को सुव्यवस्थित करना और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) प्रोटेक्शन को मजबूत करना है, जो प्राइवेट सेक्टर के इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने के लिए ज़रूरी हैं। सरकार मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम्स के आधार पर इंसेटिव के साथ इस ट्रांज़िशन को सपोर्ट करने का इरादा रखती है, जो बायो-मैन्युफैक्चरिंग और बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इंटीग्रेशन पर केंद्रित है।

ग्रोथ कॉन्टेक्स्ट और निवेशक क्या देखें?

भारत की बायोइकोनॉमी ने तेज़ी से विस्तार दिखाया है, रिपोर्टों के अनुसार 2014 से यह 16 गुना बढ़ी है। निवेशकों के लिए, यह सेक्टर शिफ्ट R&D, स्पेशलाइज्ड लैब इक्विपमेंट, कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन्स (CROs) और बायोटेक्नोलॉजी फर्मों से जुड़ी कंपनियों पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है। जहां लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल महत्वपूर्ण है, वहीं लिस्टेड कंपनियों पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित ग्रोथ फंड और रेगुलेटरी रिफॉर्म्स को कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है। इस विज़न की सफलता विशेष प्रतिभा के विकास से भी जुड़ी है, जिसमें आवश्यक वर्कफोर्स बनाने के लिए नए इंजीनियरिंग बायोलॉजी कोर्स शुरू किए जा रहे हैं।

निवेशकों को प्रस्तावित बायो-इकोनॉमी ग्रोथ फंड के विशिष्ट दिशानिर्देशों और राष्ट्रीय मिशनों के वास्तविक रोलआउट की निगरानी करनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में प्रगति और अपडेटेड रेगुलेटरी एनवायरनमेंट को नेविगेट करने में आसानी, यह संकेत देने वाले महत्वपूर्ण संकेतक होंगे कि क्या अनुमानित ग्रोथ टारगेट्स को पूरा किया जा सकता है।

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