NHPC Share Price: नतीजों के बाद गिरा स्टॉक, कर्ज का बोझ बढ़ा!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NHPC Share Price: नतीजों के बाद गिरा स्टॉक, कर्ज का बोझ बढ़ा!

NHPC के शेयरों में बुधवार को **2%** से ज्यादा की गिरावट आई और यह **₹78.80** पर आ गए। कंपनी ने Q1 FY27 के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें रेवेन्यू ग्रोथ तो अच्छी रही, लेकिन बढ़ती फाइनेंस कॉस्ट और **1.26** के कर्ज-इक्विटी रेशियो ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

नतीजों पर कैसा रहा बाजार का रिएक्शन?

NHPC के शेयरों में बुधवार को शुरुआती कारोबार में 2.11% की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹78.80 के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। यह गिरावट कंपनी द्वारा 2027 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के नतीजे जारी करने के बाद आई है। हालांकि, सरकारी बिजली कंपनी ने अपने रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ दिखाई है, लेकिन निवेशक फिलहाल कंपनी के बढ़ते कर्ज और ऊंचे ब्याज खर्चों के असर को लेकर चिंतित दिख रहे हैं।

फाइनेंसियल परफॉरमेंस और बढ़ता खर्च

जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए, NHPC ने ₹3,808.31 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 18.5% ज्यादा है। हालांकि, कंपनी का नेट प्रॉफिट ग्रोथ केवल 2.9% रहा और यह ₹1,095.87 करोड़ पर पहुंचा। रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिट ग्रोथ के बीच इस बड़े अंतर की मुख्य वजह बढ़े हुए फाइनेंस कॉस्ट और डेप्रिसिएशन (मूल्यह्रास) चार्जेज हैं। कंपनी अपनी पावर जनरेशन कैपेसिटी बढ़ाने में भारी निवेश कर रही है, जिससे ये खर्चे बढ़ रहे हैं और शेयरधारकों के लिए अंतिम मुनाफे पर अस्थायी दबाव बन रहा है।

कर्ज और प्रोजेक्ट एक्सपेंशन का दबाव

निवेशकों के बीच चर्चा का एक मुख्य बिंदु कंपनी द्वारा उधार लिए गए फंड का बढ़ता इस्तेमाल है। मार्च 2026 तक, कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (कर्ज-इक्विटी अनुपात) बढ़कर 1.26 हो गया था। यह दर्शाता है कि कंपनी अपने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज पर ज्यादा निर्भर हो रही है। बड़े पैमाने पर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट बनाने में लंबा निर्माण समय और भारी शुरुआती पूंजी खर्च होती है। भविष्य की जनरेशन कैपेसिटी को बढ़ाने की इस रणनीति से कंपनी की बैलेंस शीट पर काफी दबाव पड़ रहा है, खासकर तब जब ब्याज दरें ऊंची बनी हुई हैं या प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है।

ऑपरेशनल रिस्क और रेगुलेटरी फैक्टर

कर्ज के अलावा, कंपनी को कुछ खास ऑपरेशनल चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) से अंतिम टैरिफ अप्रूवल मिलने तक प्रोविजनली (अनंतिम रूप से) दर्ज किया जाता है। इन अप्रूवल में किसी भी तरह की देरी या टैरिफ में समायोजन से कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, तीस्ता स्टेज-VI और सुबनसिरी लोअर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में जटिल जियोलॉजिकल (भूगर्भीय) और एग्जीक्यूशन (क्रियान्वयन) चुनौतियां शामिल हैं। निवेशक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या कंपनी भारी पूंजी निवेश को सही ठहराने के लिए इन प्रोजेक्ट्स को समय पर और बजट के भीतर पूरा कर पाती है या नहीं।

बोर्ड और गवर्नेंस में बदलाव

हालिया कॉर्पोरेट डेवलपमेंट में, कंपनी ने अपनी लीडरशिप टीम को अपडेट किया है। श्री परेश रसिकलाल रणपरा को 30 जुलाई, 2026 को डायरेक्टर (पर्सोनेल) नियुक्त किया गया, और डॉ. बर्नाडेट लिंगडोह 24 जुलाई, 2026 को एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर बोर्ड में शामिल हुईं। गवर्नेंस में बदलाव आम हैं, लेकिन बाजार अक्सर यह देखता है कि नए बोर्ड सदस्य लंबी अवधि की कैपिटल एलोकेशन (पूंजी आवंटन) और डेट मैनेजमेंट (कर्ज प्रबंधन) की रणनीतियों को कैसे प्रभावित करते हैं।

आगे, निवेशकों के लिए अगली महत्वपूर्ण अपडेट कंपनी की फाइनेंस कॉस्ट को मैनेज करने की क्षमता, अंडर-कंस्ट्रक्शन पावर प्लांट्स के कमीशनिंग (शुरू होने) में प्रगति और टैरिफ ऑर्डर्स के संबंध में रेगुलेटर्स से स्पष्टता होगी। शेयरधारक यह भी ट्रैक करेंगे कि कंपनी के विस्तार के दौर में EBITDA मार्जिन, जो Q1 FY27 में 61.8% था, स्थिर रहता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.