NHAI का बड़ा फैसला: अब 1 दिसंबर से हाईवे ब्रिज के लिए होगा कड़ा इंडिपेंडेंट ऑडिट

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AuthorAditya Rao|Published at:
NHAI का बड़ा फैसला: अब 1 दिसंबर से हाईवे ब्रिज के लिए होगा कड़ा इंडिपेंडेंट ऑडिट

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। 1 दिसंबर से सभी बड़े ब्रिज और कॉम्प्लेक्स स्ट्रक्चर्स के लिए अब इंडिपेंडेंट डिजाइन ऑडिट अनिवार्य होगा, जिसका असर कंस्ट्रक्शन कंपनियों के प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और खर्च पर पड़ सकता है।

सुरक्षा के लिए नया सख्त नियम

NHAI ने इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब केवल इंटरनल रिव्यू पर निर्भर रहने के बजाय, बड़े प्रोजेक्ट्स को बाहरी विशेषज्ञों से ऑडिट करवाना होगा। यह नियम उन रिवर ब्रिज पर लागू होगा जहाँ डिजाइन डिस्चार्ज 3,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड से ज्यादा है, या जिनका स्पैन (span) 40 मीटर या उससे अधिक है। इसके अलावा, अधिक जोखिम वाले स्ट्रक्चर्स को भी इस दायरे में रखा गया है।

कौन करेगा ऑडिट?

ये ऑडिट IITs जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों, सरकारी तकनीकी निकायों और स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग फर्मों के पैनल द्वारा किए जाएंगे। इन डिजाइन्स को 'इंडियन रोड्स कांग्रेस' के कोड्स और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के हिसाब से जांचा जाएगा।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

यह बदलाव EPC, HAM और BOT मॉडल पर काम करने वाली कंपनियों के लिए काफी अहम है। अब कंपनियों को अपने शुरुआती डिजाइन NHAI को सौंपने होंगे, जहाँ अथॉरिटी विशेषज्ञों का पैनल नियुक्त करेगी। ऑडिट के बाद अगर कोई बदलाव सुझाया जाता है, तो निर्माण कार्य शुरू होने से पहले उसे लागू करना अनिवार्य होगा।

निवेशकों के नजरिए से, यह प्रक्रिया कंस्ट्रक्शन की गति को थोड़ा प्रभावित कर सकती है। अगर ऑडिट के कारण प्रोजेक्ट्स में बदलाव की जरूरत पड़ी, तो इससे काम में देरी (delays) या लागत (costs) में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। आने वाले समय में इन्वेस्टर कॉल के दौरान कंपनियों से इन अनुपालन लागतों (compliance costs) और प्रोजेक्ट टाइमलाइन पर पड़ने वाले असर को समझना बेहद जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.