National Green Tribunal (NGT) ने BHEL की भोपाल यूनिट में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के काम न करने पर जांच के आदेश दिए हैं। पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से कंपनी के ESG प्रोफाइल पर असर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
BHEL भोपाल यूनिट पर कानूनी शिकंजा
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बरखेड़ा पठानी स्थित BHEL की यूनिट में सीवेज प्लांट के लंबे समय से बंद रहने के मामले में जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों और किसानों की शिकायतों के बाद, NGT ने एक जॉइंट कमेटी गठित की है जो इस पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपेगी। भोपाल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को भी नोटिस जारी किया गया है। निवेशकों के नजरिए से यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकारी कंपनियों के लिए ऐसी रेगुलेटरी चूक उनकी साख और ESG स्कोर पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
दिल्ली में प्रोजेक्ट्स की देरी
राष्ट्रीय राजधानी में भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार सुस्त पड़ती दिख रही है। दिल्ली जल बोर्ड का 'इंटरसेप्टर सीवर प्रोजेक्ट' फिलहाल 90% फिजिकल पूरा हो चुका है, लेकिन फाइनेंशियल प्रोग्रेस अभी भी 48% पर ही अटकी है। मॉनसून के कारण काम रुकने की वजह से अब इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2026 कर दिया गया है। इसके अलावा, कोंडली और जगृति विहार के सीवेज प्लांट में भी अपग्रेड का काम जारी है, जिसके 2028 तक पूरा होने का अनुमान है।
पश्चिम बंगाल में ईंट भट्ठों के लिए नई गाइडलाइंस
एक अलग घटनाक्रम में, पश्चिम बंगाल की स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि स्टैंडअलोन ईंट भट्ठों को पहले से एनवायरनमेंट क्लीयरेंस की जरूरत नहीं है। यह नियम 2006 के एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट नोटिफिकेशन के अनुरूप है, जिससे छोटे औद्योगिक सेक्टर में रेगुलेटरी स्पष्टता आएगी।
