NFRA का बड़ा ऐलान: ऑडिट में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के लिए जारी किए 10 सिद्धांत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NFRA का बड़ा ऐलान: ऑडिट में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के लिए जारी किए 10 सिद्धांत

नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) ने ऑडिटर्स के लिए टेक्नोलॉजी, खासकर AI और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल को लेकर 10 महत्वपूर्ण सिद्धांत जारी किए हैं। रेगुलेटर ने साफ किया है कि टेक्नोलॉजी से काम आसान हो सकता है, लेकिन ऑडिट की सटीकता और गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी ऑडिटर्स की ही होगी।

Detailed Coverage

टेक्नोलॉजी बनेगी मददगार, पर मालिक ऑडिटर ही रहेंगे

NFRA ने एक नया ढांचा पेश किया है जिसमें ऑडिट फर्मों को यह बताया गया है कि वे अपने काम में आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे करें। आजकल ऑडिट फर्म बड़ी मात्रा में वित्तीय डेटा को समझने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स जैसे टूल्स का खूब इस्तेमाल कर रही हैं। NFRA की कोशिश है कि इन नई तकनीकों से ऑडिट की क्वालिटी पर कोई असर न पड़े।

ऑडिटर की जिम्मेदारी और प्रोफेशनल निर्णय

NFRA के इन नियमों का मुख्य जोर इस बात पर है कि टेक्नोलॉजी सिर्फ एक सहायक टूल की तरह इस्तेमाल हो, न कि इंसानी विशेषज्ञता का विकल्प। रेगुलेटर ने साफ कर दिया है कि महंगे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने से ऑडिटर अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते। भले ही ऑडिट में ऑटोमेटेड तकनीकों का बहुत इस्तेमाल हुआ हो, अंतिम फैसला और ऑडिट की क्वालिटी की सारी जिम्मेदारी ऑडिटर की ही रहेगी। इसका मतलब है कि फर्म किसी खास टूल या वेंडर का नाम लेकर गलत या अधूरी ऑडिट रिपोर्ट के लिए खुद को सही नहीं ठहरा पाएंगी।

डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा के मानक

सटीकता के अलावा, NFRA ने संवेदनशील वित्तीय जानकारी की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया है। ऑडिटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि थर्ड-पार्टी टेक्नोलॉजी टूल्स से प्रोसेस किया जा रहा सारा डेटा, 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023' के तहत सुरक्षित रहे। गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि फर्मों को सिर्फ सॉफ्टवेयर वेंडर्स की सर्विस टर्म्स पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि क्लाइंट की जानकारी को संभालने से पहले इन टूल्स के सख्त एथिकल और लीगल स्टैंडर्ड्स की खुद जांच करनी चाहिए।

प्रोफेशनल शक को बनाए रखना जरूरी

रेगुलेटर ने 'ऑटोमेशन बायस' के खतरे के प्रति भी आगाह किया है, जहां ऑडिटर किसी सॉफ्टवेयर के आउटपुट को बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेता है। नए सिद्धांतों के तहत, ऑडिटर्स को प्रोफेशनल शक (skepticism) का उच्च स्तर बनाए रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि टेक्नोलॉजी से मिले सभी नतीजों की विश्वसनीयता का ठीक से मूल्यांकन किया जाए। इसके अलावा, ऑडिट फर्मों को अपने मौजूदा क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम के भीतर टेक्नोलॉजी से जुड़े जोखिमों की पहचान करनी होगी और उन्हें मैनेज करना होगा।

निवेशकों के लिए ये गाइडलाइंस इसलिए अहम हैं क्योंकि ये वित्तीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता को मजबूत करती हैं। NFRA का लक्ष्य है कि टेक्नोलॉजी के दौर में स्पीड के चक्कर में क्वालिटी से समझौता न हो और कोई भी कमी न रह जाए। आगे चलकर, बाजार यह देखेगा कि बड़ी ऑडिट फर्म्स इन सिद्धांतों के अनुसार अपने आंतरिक कंट्रोल सिस्टम को कैसे अपडेट करती हैं, खासकर AI-संचालित एनालिटिकल टूल्स की सटीकता को जांचने के मामले में।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.