NEET-UG: 2027 से पूरी तरह डिजिटल होगा एग्जाम, **25 लाख** छात्रों के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर चैलेंज

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AuthorNeha Patil|Published at:
NEET-UG: 2027 से पूरी तरह डिजिटल होगा एग्जाम, **25 लाख** छात्रों के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर चैलेंज

परीक्षा की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए NTA ने बड़ा फैसला लिया है। साल 2027 से NEET-UG एग्जाम को पूरी तरह कंप्यूटर-आधारित (CBT) फॉर्मेट में शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए **25 लाख** उम्मीदवारों की विशाल संख्या को संभालने हेतु बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, जो असेसमेंट प्रोवाइडर्स के लिए नए मौके लेकर आएगा।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) NEET-UG प्रवेश परीक्षा में बड़ा बदलाव करने जा रही है। साल 2027 से यह परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर-आधारित यानी CBT मोड में होगी। यह फैसला हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक विवादों और सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर लिया गया है। अब पारंपरिक OMR शीट्स के बजाय पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, ताकि इसे टेंपर-प्रूफ बनाया जा सके।

इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी चुनौती

25 लाख छात्रों के लिए एक साथ कंप्यूटर टर्मिनल उपलब्ध कराना एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है। NEET-PG जैसे अन्य एग्जाम्स की तुलना में यह दायरा बहुत बड़ा है। इस कमी को दूर करने के लिए NTA, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) के साथ मिलकर सरकारी यूनिवर्सिटीज, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक के कंप्यूटर लैब का इस्तेमाल करेगी।

क्यों सरकारी कॉलेजों को चुना गया?

K-12 स्कूलों में अक्सर हाई-स्पीड इंटरनेट और पावर बैकअप जैसी सुविधाओं की कमी होती है। इसके उलट, तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पहले से ही मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा प्रोटोकॉल मौजूद हैं। अब शिक्षा क्षेत्र में उन संस्थानों की मांग बढ़ सकती है जिनके पास बेहतर डिजिटल सुविधाएं हैं।

जोखिम और चुनौतियां

डिजिटल बदलाव से 'डिजिटल डिवाइड' का खतरा भी बढ़ा है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के कई क्षेत्रों में अभी भी कंप्यूटर और कनेक्टिविटी की पर्याप्त सुविधा नहीं है। इसके अलावा, NTA के सामने यह विकल्प भी है कि क्या परीक्षा को कई शिफ्ट में कराया जाए, जिससे टर्मिनल की जरूरत कम हो, लेकिन फिर 'स्कोर नॉर्मलाइजेशन' की जटिलता बढ़ जाएगी।

टेस्टिंग इकोसिस्टम पर असर

इन्वेस्टर्स के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है। अब बाजार का फोकस केवल पेपर छपाई से हटकर डिजिटल सिक्योरिटी, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सॉफ्टवेयर परफॉर्मेंस की तरफ शिफ्ट हो रहा है। आने वाले समय में सरकारी टेंडर्स और टेस्टिंग सॉफ्टवेयर प्रोक्योरमेंट इस सेक्टर की दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.