NEET-UG परीक्षा में हुए बड़े पेपर लीक कांड के बाद, भारत अब GRE जैसे AI-आधारित परीक्षा मॉडल पर विचार कर रहा है। इस नए सिस्टम से **2.27 मिलियन** छात्रों की परीक्षा प्रभावित हुई थी। इसका मकसद परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाना है।
NEET-UG परीक्षा में बड़े बदलाव की आहट
साल 2026 में हुए NEET-UG पेपर लीक कांड ने भारत की मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना ने 2.27 मिलियन से ज़्यादा छात्रों को प्रभावित किया और परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इसी के चलते, सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल रिव्यू शुरू किया है। इस मामले की जांच CBI कर रही है और इसी बीच, Nandan Nilekani की अगुवाई में एक विशेष टास्क फोर्स भी बनाई गई है जो सिस्टम में बड़े सुधारों का प्रस्ताव देगी।
AI-आधारित परीक्षा मॉडल की ओर कदम
पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए, अधिकारी अब ग्रेजुएट रिकॉर्ड एग्जामिनेशन (GRE) की तरह एक नए परीक्षा मॉडल पर विचार कर रहे हैं। पारंपरिक परीक्षा में सभी छात्रों को एक ही प्रश्न पत्र मिलता है, लेकिन नए प्रस्तावित सिस्टम में प्रश्नों का एक विशाल डेटाबेस होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके, हर छात्र के लिए एक अनोखा प्रश्न पत्र तैयार किया जा सकेगा। इस तरीके से, अगर कोई एक प्रश्न पत्र लीक भी हो जाता है, तो पूरी राष्ट्रीय परीक्षा रद्द नहीं होगी, जिससे बड़े पैमाने पर पेपर लीक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
सिस्टमैटिक सुधार और जवाबदेही
इस घटना ने संस्थागत जवाबदेही की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया है। 2026 की परीक्षा से जुड़े मामले में पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि लीक से संबंधित मामलों को विशेष अदालतों में तेज़ी से निपटाया जाए। छात्रों और अभिभावकों के लिए, परीक्षा में लचीलापन और संभवतः एक कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद दोबारा परीक्षा देने का विकल्प मिलना, मौजूदा हाई-स्टेक सिंगल-विंडो टेस्टिंग माहौल से एक बड़ा बदलाव होगा। एक्सपर्ट पैनल इस मॉडल को लागू करने के लिए ज़रूरी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) को अंतिम रूप दे रहा है।
निवेशकों और संस्थानों पर असर
हालांकि यह मुख्य रूप से एक शैक्षिक और नियामक मामला है, भारत की परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर तकनीकी एकीकरण की ओर यह कदम डिजिटल असेसमेंट, डेटा सिक्योरिटी और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि क्या यह बदलाव सुरक्षित, क्लाउड-आधारित असेसमेंट प्लेटफॉर्म और एडवांस्ड साइबर सुरक्षा उपायों पर सरकारी खर्च को बढ़ाएगा। इस नए सिस्टम की सफलता और सार्वजनिक विश्वास को बहाल करने की इसकी क्षमता पर शिक्षा क्षेत्र पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव निर्भर करेगा। अगले बड़े अपडेट में नए परीक्षा ढांचे की आधिकारिक घोषणा और इसे मौजूदा अकादमिक कैलेंडर में एकीकृत करने की समय-सीमा शामिल होगी।
