NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद, छात्र कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारी परिवारों ने सरकार से छात्रों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की है।
जंतर-मंतर पर नई भूख हड़ताल!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को छात्र कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। यह कदम जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उठाया गया है। वांगचुक 20 दिनों से NEET परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर उपवास पर थे और उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था।
प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, प्रदर्शनकारियों के परिवारों ने कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र के पिता, भगवान दीपके ने सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए और परिवारों पर पड़ रहे भावनात्मक दबाव को उजागर किया। उन्होंने प्रशासन पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया।
सोनम वांगचुक की सेहत में गिरावट
मेडिकल टीम के अनुसार, सोनम वांगचुक ने अपने 20 दिनों के उपवास के दौरान करीब 9.5 किलोग्राम वजन कम किया है। उनके अस्पताल में भर्ती होने से विरोध प्रदर्शनों को और बल मिला है। कई समर्थकों और विपक्षी नेताओं ने सरकार के रवैये की निंदा की है और आरोप लगाया है कि प्रशासन छात्रों की चिंताओं के प्रति असंवेदनशील है, जिन्हें लगता है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता किया गया है।
छात्रों की भावनाओं पर असर
NEET परीक्षा भारत भर के लाखों छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है, जो प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रश्न पत्र लीक, स्कोरिंग में विसंगतियों और लॉजिस्टिक विफलताओं जैसी अनियमितताओं के आरोपों ने व्यापक अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस अविश्वास के माहौल के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के नेतृत्व में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शिक्षाविदों और उम्मीदवारों के परिवारों के लिए, मुख्य चिंता परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी हुई है।
निवेशक और विश्लेषक इस स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं, क्योंकि यह व्यापक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों को दर्शाता है जो सार्वजनिक भावना और संस्थागत स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। जंतर-मंतर पर जारी तनाव इस बात पर जोर देता है कि यदि प्रदर्शनकारियों और संबंधित अधिकारियों के बीच कोई समाधान नहीं निकलता है, तो लंबे समय तक व्यवधान बना रह सकता है। इस घटनाक्रम पर नज़र रखने वालों के लिए अगली महत्वपूर्ण जानकारी शिक्षा मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या NEET परीक्षा की गहन जांच की मांग पर अदालती हस्तक्षेप होगी।
