राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में नेतृत्व को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद सिंह ने हाल ही में सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे कानूनी चुनौती दी है।
NCP में नेतृत्व का संकट गहराता दिख रहा है। पार्टी के झारखंड इकाई के प्रमुख सच्चिदानंद सिंह ने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सुनेत्रा पवार के निर्वाचन को कानूनी रूप से चुनौती दी है। सिंह ने 26 फरवरी, 2026 को संपन्न हुई इस चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर प्रश्नचिन्ह लगाया है।
9 जुलाई, 2026 को जारी एक कानूनी नोटिस में, सिंह ने चुनाव परिणामों को रद्द करने और एक स्वतंत्र अधिकारी की देखरेख में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है। यह नोटिस सुनेत्रा पवार, कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और पार्टी सचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है। इसमें पार्टी के आंतरिक शासन और संवैधानिक नियमों के पालन पर चिंता जताई गई है।
विवाद का मुख्य बिंदु पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार के 28 जनवरी, 2026 को हुए निधन के बाद की संक्रमण अवधि है। कानूनी चुनौती के अनुसार, पार्टी ने 17 फरवरी, 2026 को चुनाव आयोग में संशोधित संविधान जमा किया था। सिंह की कानूनी टीम का तर्क है कि इस संशोधन ने प्रफुल्ल पटेल को औपचारिक चुनाव पूरा होने तक पार्टी प्रमुख के रूप में कार्य करने का अधिकार दिया था। शिकायत का सार 26 फरवरी को हुई बैठक के अधिकार पर सवाल उठाता है, विशेष रूप से यह कि पार्टी सचिव बृजमोहन श्रीवास्तव के पास राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का कानूनी अधिकार कैसे था, जिससे यह नियुक्ति हुई।
इसके अलावा, चुनौती में राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्यों के बीच कथित असहमति का भी उल्लेख है। सिंह का दावा है कि 18 फरवरी, 2026 को चुनाव आयोग को भेजी गई बैठक की समय-सारणी संबंधी चिट्ठी को समिति के सदस्यों से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली थी। उनका तर्क है कि इससे पूरी चुनावी प्रक्रिया कमजोर हुई।
राजनीतिक दलों में नेतृत्व परिवर्तन अक्सर आंतरिक जांच के दायरे में आते हैं, लेकिन यह घटना NCP की संगठनात्मक संरचना के भीतर चल रहे तनावों को उजागर करती है। इस कानूनी नोटिस का परिणाम पार्टी की भविष्य की निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और नेतृत्व की स्थिरता पर असर डाल सकता है। फिलहाल, सुनेत्रा पवार या नोटिस में नामित अन्य पार्टी अधिकारियों ने आरोपों पर कोई औपचारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
स्थिति अभी शुरुआती चरण में है, और निवेशक व पर्यवेक्षक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या यह मामला औपचारिक न्यायिक हस्तक्षेप की ओर बढ़ता है या पार्टी प्रबंधन आंतरिक चर्चा के माध्यम से समाधान तलाशता है। फिलहाल, 26 फरवरी के चुनाव की वैधता विवादित बनी हुई है।
