National Conference में बगावत! J&K कैबिनेट में फेरबदल की मांग से मची हलचल

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AuthorAditya Rao|Published at:
National Conference में बगावत! J&K कैबिनेट में फेरबदल की मांग से मची हलचल

Jammu and Kashmir में National Conference के 19 विधायकों ने हालिया कैबिनेट नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगियों के बढ़ते प्रभाव से पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ गई है, जिससे प्रशासनिक स्थिरता पर भी खतरा मंडराने लगा है।

कैबिनेट पर बढ़ा दबाव

जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी National Conference (NC) के भीतर तनाव चरम पर है। पार्टी के 19 बागी विधायकों ने एक बैठक करके कैबिनेट में बड़े फेरबदल की मांग रखी है। यह बैठक कैसर जमशेद लोन के आवास पर हुई, जिसका उद्देश्य एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार करना था जिसे अब पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को सौंपा जाएगा। यह असंतोष 27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद सामने आया है, जिसमें 4 नए मंत्री बनाए गए थे।

मुख्यमंत्री के करीबियों पर सवाल

विधायकों की मुख्य नाराजगी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दो प्रमुख सहयोगियों—नासिर असलम वानी और शम्मी ओबेरॉय के बढ़ते प्रभाव को लेकर है। बागी नेताओं का आरोप है कि ये दोनों व्यक्ति प्रशासनिक और सांगठनिक फैसलों में अनावश्यक दखलअंदाजी कर रहे हैं। नाराजगी की मुख्य वजह हालिया मंत्री चयन प्रक्रिया है, जिसमें कई सीनियर नेताओं को नजरअंदाज किया गया।

पार्टी के भीतर 'सफाई'

इस बगावत का असर पार्टी संगठन पर भी दिखने लगा है। बागी विधायकों की बैठक में शामिल होने के बाद सीनियर नेता मुबारक गुल को उनके जनरल सेक्रेटरी के पद से हटा दिया गया है। खबरों के अनुसार, कैबिनेट विस्तार में जगह न मिलने के कारण गुल पार्टी नेतृत्व से पहले ही नाराज थे।

गवर्नेंस और निवेश पर असर

जम्मू-कश्मीर के लिए स्थानीय सरकार की स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी तरह का आंतरिक टकराव गवर्नेंस की रफ्तार को धीमा कर सकता है। राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर, टूरिज्म और सर्विस सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशक इस राजनीतिक स्थिरता पर पैनी नजर रखे हुए हैं। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या फारूक अब्दुल्ला इस आंतरिक कलह को सुलझा पाएंगे या यह विवाद सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बनेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.