NABARD और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) ने मिलकर 'ग्रामोद्योग' (Gramodyam) पहल की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य अगले तीन सालों में लगभग 4,000 ग्रामीण उद्यमियों को तैयार करना और उनका समर्थन करना है। यह योजना कौशल प्रशिक्षण, मेंटरशिप और क्रेडिट की सुविधा देकर स्थानीय व्यवसाय स्थापित करने में मदद करेगी। खास बात यह है कि यह ग्रामीण इकाइयों को रीजनल रूरल बैंक्स के ज़रिए औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने पर भी ध्यान देगी।
ग्रामीण भारत में नए व्यवसायों को बढ़ावा
नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) ने मिलकर 'ग्रामोद्योग' (Gramodyam) नामक एक खास कार्यक्रम का ऐलान किया है। NABARD के 45वें स्थापना दिवस पर पेश की गई इस योजना का मकसद भारत के ग्रामीण इलाकों में नए व्यवसायों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना है। अगले तीन सालों में, यह पहल करीब 4,000 महत्वाकांक्षी उद्यमियों को ट्रेनिंग और सहारा देने पर केंद्रित होगी। यह छोटे पैमाने के उद्योगों को बढ़ावा देने और उन्हें वित्तीय सहायता दिलाने में मदद करेगी, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी इनका विस्तार हो सके।
क्रेडिट तक पहुंच और वित्तीय जुड़ाव
'ग्रामोद्योग' की एक अहम खासियत यह है कि यह ग्रामीण उद्यमियों और बैंक जैसी औपचारिक वित्तीय संस्थाओं के बीच की दूरी को कम करने की कोशिश करेगा। यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को बैंक योग्य प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने में मदद करेगा, जो लोन मिलने के लिए ज़रूरी होते हैं। साथ ही, यह पहल उद्यमियों को रीजनल रूरल बैंक्स (RRBs) और अन्य वित्तीय संस्थानों से जुड़ने का रास्ता भी दिखाएगी। डिजिटल लोन एप्लीकेशन की सुविधा और सरकारी सब्सिडी की जानकारी देकर, यह योजना नए कारोबारों की सफलता दर बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
कार्यक्रम की संरचना और डिजिटल निगरानी
'ग्रामोद्योग' एक हाइब्रिड, डिजिटल-फर्स्ट मॉडल का उपयोग करता है, जिससे इसे विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आसानी से लागू किया जा सके। इंडस्ट्री फॉर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (IID) इस कार्यक्रम का इंप्लीमेंटेशन पार्टनर है, जो इंडस्ट्री-स्पेशिफिक ट्रेनिंग और व्यक्तिगत मेंटरशिप प्रदान करेगा। खास बात यह है कि यह कार्यक्रम साइकोमेट्रिक असेसमेंट का भी इस्तेमाल करेगा, जिससे उम्मीदवारों को उनके स्थानीय माहौल के अनुसार बेहतर बिजनेस मॉडल चुनने में मदद मिलेगी। NSDC का डिजिटल प्लेटफॉर्म अहम मेट्रिक्स की निगरानी करेगा, जैसे कि उद्योग आधार (Udyam) और जीएसटी (GST) रजिस्ट्रेशन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह पहल ग्रामीण इलाकों में क्रेडिट की पहुंच को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जैसे-जैसे ग्रामीण व्यवसाय औपचारिक होंगे, वे बेहतर क्रेडिट पेनिट्रेशन में योगदान देंगे। इस कार्यक्रम से जुड़े सफलता के मापदंडों, जैसे कि बिजनेस का चालू होना और बिक्री के सत्यापित रिकॉर्ड, भविष्य में ग्रामीण माइक्रो-एंटरप्राइजेज के स्वास्थ्य का आकलन करने में सहायक हो सकते हैं। बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के निवेशकों के लिए, इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (Priority Sector Lending) के तहत योग्य उधारकर्ताओं की संख्या बढ़ा सकते हैं।
