मुंबई में मैक्डॉनल्ड्स का रैपर! स्ट्रीट फूड में इस्तेमाल पर छिड़ी बहस, पैकेजिंग वेस्ट पर उठे सवाल

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AuthorNeha Patil|Published at:
मुंबई में मैक्डॉनल्ड्स का रैपर! स्ट्रीट फूड में इस्तेमाल पर छिड़ी बहस, पैकेजिंग वेस्ट पर उठे सवाल

मुंबई में एक स्ट्रीट फूड विक्रेता के पास अमेरिकी मैक्डॉनल्ड्स का रैपर मिलने से हड़कंप मच गया है। इस घटना ने औद्योगिक पैकेजिंग के रीसाइक्लिंग और फूड-ग्रेड सामग्री की सप्लाई चेन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फूड सेफ्टी से पैकेजिंग वेस्ट तक का सफर

यह पूरा मामला महाराष्ट्र FDA (Food and Drug Administration) की सख्ती के बाद शुरू हुई चर्चा से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह दावा किया गया था कि FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे के कड़े नियमों के चलते एक स्थानीय स्ट्रीट वेंडर अखबार की जगह अब डेडिकेटेड फूड-ग्रेड रैपर का इस्तेमाल कर रहा है।

लेकिन, पोस्ट के साथ शेयर की गई तस्वीर में अमेरिकी मैक्डॉनल्ड्स के 'एग बेकन एंड बिस्किट' (Egg Bacon & Biscuit) का रैपर था। यह आइटम खासतौर पर अमेरिका में बिकता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि यह रैपर मुंबई के अनौपचारिक बाजार तक कैसे पहुंचा?

क्या है 'रिजेक्टेड पैकेजिंग' का खतरा?

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां अक्सर अपनी पैकेजिंग का प्रोडक्शन भारत की फैक्ट्रियों से कराती हैं। क्वालिटी कंट्रोल के कड़े मानकों के चलते, अगर पैकेजिंग की किसी छोटी सी प्रिंटिंग मिस्टेक, गलत ब्रांडिंग या डिज़ाइन में गड़बड़ी की वजह से बैच रिजेक्ट हो जाता है, तो उसे वेस्ट मैनेजमेंट के सख्त नियमों के तहत नष्ट किया जाना चाहिए।

हालांकि, चिंता की बात यह है कि कई बार यह 'रिजेक्टेड' या बचा हुआ स्टॉक सेकंडरी मार्केट में पहुंच जाता है। इस केस में सीधे तौर पर किसी लिस्टेड कंपनी के शामिल होने का कोई सबूत नहीं है, लेकिन यह घटना रेगुलेटर्स के सामने औद्योगिक सामग्री के इस्तेमाल और निपटान पर नजर रखने की चुनौती को उजागर करती है।

महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई का असर

कमिश्नर तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में महाराष्ट्र FDA राज्य भर में हाइजीन स्टैंडर्ड को बेहतर बनाने के लिए लगातार इंस्पेक्शन कर रही है। इसका मुख्य फोकस अखबारों जैसी नॉन-फूड-ग्रेड चीजों के इस्तेमाल को रोकना है, जिनमें हानिकारक स्याही और केमिकल हो सकते हैं जो खाने में मिल सकते हैं।

जैसे-जैसे अथॉरिटीज विक्रेताओं पर सुरक्षित पैकेजिंग अपनाने का दबाव बढ़ा रही हैं, वैसे-वैसे किफायती और सर्टिफाइड फूड-ग्रेड मटेरियल की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि स्टैंडर्ड और हाइजीनिक पैकेजिंग की ओर बढ़ना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें सिर्फ सख्ती ही नहीं, बल्कि लोकल मार्केट में सही सामग्री की उपलब्धता और उसकी ट्रेसिबिलिटी भी अहम है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.