मुंबई की एक **68** वर्षीय रिटायर्ड महिला को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर **₹7.21 करोड़** की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया। ठगों ने सरकारी अधिकारी बनकर महिला को निवेश लिक्विडेट करने के लिए मजबूर किया।
क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
साउथ रीजन साइबर पुलिस मामले की जांच कर रही है। ठगों ने खुद को 'नेशनल डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड' का अधिकारी बताकर महिला को फोन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला का मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग जैसे गंभीर मामलों में शामिल है।
कैसे फंसाया जाल में?
आरोपियों ने WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए खुद को Enforcement Directorate और Reserve Bank of India का अधिकारी बताया। नकली कानूनी दस्तावेज दिखाकर महिला को इतना डराया गया कि उन्होंने अपनी सारी सेविंग्स—जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स—को तोड़ दिया। यह पूरी रकम बाद में USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलकर विभिन्न वॉलेट्स के जरिए ट्रांसफर कर दी गई, जिससे रिकवरी की संभावना बेहद कम हो गई है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
साइबर एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि भारत में कोई भी सरकारी एजेंसी या बैंक 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं रखता और न ही वीडियो कॉल पर पैसे की मांग करता है। कभी भी किसी अनजान नंबर से आए धमकी भरे कॉल पर अपनी फाइनेंशियल डिटेल्स शेयर न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल आने पर सीधे संबंधित संस्था के आधिकारिक ऑफिस से संपर्क करें और 1930 पर तुरंत साइबर क्राइम में रिपोर्ट करें।
