अगस्त 2026 के 'Mood of the Nation' सर्वे में सामने आया है कि **60.2%** भारतीय इलेक्शन कमीशन द्वारा मतदाता सूची को साफ करने के प्रयासों का समर्थन करते हैं। हालांकि, निष्पक्ष चुनाव पर लोगों का भरोसा पिछले साल के **64.4%** से गिरकर **51.9%** रह गया है। इसके अलावा, **76%** लोग अवैध प्रवासन को सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानते हैं।
ताजा 'Mood of the Nation' सर्वे ने भारत के चुनावी और सुरक्षा ढांचे को लेकर जनता की बदलती राय को सामने रखा है। जहां इलेक्शन कमीशन की 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न' (SIR) प्रक्रिया को 60.2% जनता का समर्थन प्राप्त है, वहीं व्यापक चुनावी प्रणाली को लेकर लोगों में संदेह बढ़ रहा है।\n\n### चुनावी निष्पक्षता पर घटता भरोसा\nसर्वे के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। केवल 51.9% नागरिक अब मानते हैं कि भारत में चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र होते हैं। पिछले साल यानी अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 64.4% था। यह गिरावट दर्शाती है कि संस्थागत प्रक्रियाओं पर जनता का भरोसा एक बड़ा बहस का विषय बन गया है। हालांकि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की मांग बहुत ज्यादा है, लेकिन इसके प्रशासनिक क्रियान्वयन पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।\n\n### विवाद और सुरक्षा चिंताएं\nसर्वे में शामिल करीब 20% प्रतिभागियों ने वेरिफिकेशन प्रक्रिया में पक्षपात की आशंका जताई है, जबकि 10.5% का मानना है कि इस पहल का इस्तेमाल विशेष जनसांख्यिकी (Demographics) को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। \n\nदूसरी ओर, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रवासन जनता की मुख्य प्राथमिकता बने हुए हैं। सर्वे के अनुसार 76% लोगों का मानना है कि अवैध प्रवासन देश के लिए एक गंभीर खतरा है। यह चिंता वोटर लिस्ट में सख्त वेरिफिकेशन की मांग को और बढ़ा रही है। फिलहाल इलेक्शन कमीशन पर भरोसे को लेकर जनता बंटी हुई है—जहां 43.3% लोगों का भरोसा बढ़ा है, वहीं 38% लोगों का मानना है कि भरोसा कम हुआ है। ऐसे में प्रशासनिक सख्ती और चुनावी निष्पक्षता के बीच संतुलन बनाए रखना अब आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
