देश में मानसून की चाल अटकी हुई है, जिससे मौसम का एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां ओडिशा में भारी बारिश और रेड अलर्ट जारी है, वहीं दिल्ली-एनसीआर जैसे उत्तर-पश्चिमी इलाकों में कमजोर मॉनसून की वजह से भीषण गर्मी पड़ रही है। पिछले एक दशक में ऐसी स्थिति सिर्फ दो बार बनी है, जिससे खेती-किसानी और पानी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ओडिशा में मूसलाधार बारिश, रेड अलर्ट जारी
भारत में मानसून का संतुलन इन दिनों पूरी तरह बिगड़ा हुआ है। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बन रहे एक मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम के कारण पूर्वी राज्यों में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ओडिशा के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है, जहां कई जिलों में 205 मिलीमीटर से भी ज़्यादा बारिश होने की आशंका है। इतनी भारी बारिश से बाढ़ और जलजमाव जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
बिहार-बंगाल में ऑरेंज अलर्ट, खेती पर असर
ओडिशा के अलावा, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी भारी से बहुत भारी बारिश ( 115.6 मिमी से 204.4 मिमी के बीच) का अनुमान है, जिसके चलते इन राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, पूर्वोत्तर, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी तेज आंधी-तूफान की चेतावनी है। ऐसे मौसम में खेती-किसानी पर भी असर पड़ रहा है। ज़्यादा बारिश वाले इलाकों के किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों से पानी की निकासी का इंतजाम करें और कीटनाशक का छिड़काव फिलहाल टाल दें, क्योंकि तेज बारिश से वे बह सकते हैं।
उत्तर भारत में मानसून की सुस्ती
दूसरी तरफ, दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिमी भारत में मानसून की चाल बेहद धीमी है। यहां अगले कुछ दिनों में हल्की बारिश की ही उम्मीद है, जिससे गर्मी और उमस से कोई खास राहत नहीं मिलने वाली। पारा अभी भी करीब 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई में मॉनसून का ऐसा धीमा पड़ना पिछले 11 सालों में सिर्फ दो बार ही देखा गया है। इस वजह से उत्तरी भारत की फसलों को मिलने वाला ज़रूरी पानी नहीं मिल पा रहा है।
आगे क्या?
बाजार पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता मॉनसून के फिर से सक्रिय होने का समय है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, करीब 24 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसम सिस्टम बन सकता है, जो उत्तरी राज्यों में बारिश ला सकता है। तब तक, उत्तर भारत के सूखे और पूर्वी भारत में बाढ़ के खतरे के बीच क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर ध्यान रहेगा। किसान कमोडिटी की कीमतों और बिजली की मांग पर भी नज़र रखेंगे, क्योंकि उत्तर भारत में लगातार गर्मी से बिजली की खपत बढ़ेगी, वहीं पूर्वी भारत में भारी बारिश से सप्लाई चेन में दिक्कतें आ सकती हैं।
