| असम और हिमालयी मार्गों पर मॉनसून का कहर, बाढ़ और भूस्खलन से हाहाकार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
| असम और हिमालयी मार्गों पर मॉनसून का कहर, बाढ़ और भूस्खलन से हाहाकार

देश के कई हिस्सों में मॉनसून का विकराल रूप देखने को मिल रहा है। असम में **872** गाँव पानी में डूब गए हैं, जिससे **5.64 लाख** लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन ने तीर्थयात्रियों के रास्ते बंद कर दिए हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

Detailed Coverage

असम में बाढ़ का विकराल मंजर

पूरे भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का असर तेज हो गया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ रहा है। असम में स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है, जहां ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं। इसके चलते 872 गांवों में बाढ़ आ गई है, जिससे घरों और इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही 24,000 हेक्टेयर से ज्यादा खेती की जमीन भी जलमग्न हो गई है। सिवासगर, चायोडेओ, गोलाघाट और जोरहाट जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां NDRF और स्थानीय बचाव दल राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

हिमालयी इलाकों में कनेक्टिविटी ठप्प

पूर्वोत्तर में बाढ़ के अलावा, पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमालयी बेल्ट में भी भारी बारिश का दौर जारी है। जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने कई जगहों पर भूस्खलन को जन्म दिया है। इन घटनाओं ने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों और लोकप्रिय तीर्थ स्थलों जैसे वैष्णो देवी और केदारनाथ जाने वाले रास्तों को अवरुद्ध कर दिया है। इन रास्तों के बंद होने से पर्यटन और स्थानीय परिवहन व्यवस्था पर तत्काल लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें आ गई हैं। क्षेत्रीय अधिकारी इन मार्गों को खोलने के लिए काम कर रहे हैं।

देश के विभिन्न राज्यों में मौसम की चेतावनी

खेती और उद्योगों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाने वाले क्षेत्र हाई अलर्ट पर हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुजरात और मध्य महाराष्ट्र के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जहां अत्यंत भारी बारिश की संभावना है जो स्थानीय कामकाज को बाधित कर सकती है। इसके अलावा, पूर्वी राजस्थान, कोंकण, गोवा और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

निवेशकों के नजरिए से, मॉनसून की तीव्रता कृषि और ग्रामीण उपभोग जैसे क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। निकट भविष्य में अत्यधिक बारिश से फसलों को अस्थायी नुकसान और लॉजिस्टिक्स में देरी हो सकती है, जो सप्लाई चेन और कमोडिटी की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। कृषि अधिकारियों ने किसानों को संभावित नुकसान को कम करने के लिए जल निकासी और पशुधन की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है।

निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?

बाजार के प्रतिभागी इन भारी बारिश की अवधि और भौगोलिक विस्तार पर नजर रख रहे हैं। मुख्य बातें जिन पर ध्यान देना चाहिए, उनमें हिमालयी क्षेत्र में सड़कों की बहाली की गति शामिल है, जो पर्यटन क्षेत्र को प्रभावित करती है, और बाढ़ प्रभावित जिलों में खड़ी फसलों को हुए नुकसान की सीमा, जो स्थानीय कृषि उपज और कुछ खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति के रुझान को प्रभावित कर सकती है। IMD आगे भी अपडेट जारी करेगा, और मॉनसून के अगले चरणों की तीव्रता क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधि पर समग्र प्रभाव को निर्धारित करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.