अगर आपने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के 30 दिनों के अंदर वेरिफाई नहीं किया है, तो यह अमान्य माना जाएगा। इस चूक से सेक्शन 234F के तहत ₹5,000 तक का जुर्माना लग सकता है और आपका टैक्स रिफंड भी अटक सकता है। इससे बचने के लिए, आधार OTP, नेट बैंकिंग या CPC बेंगलुरु में फिजिकल कॉपी भेजकर वेरिफिकेशन पूरा करना ज़रूरी है।
ITR वेरिफिकेशन की बड़ी भूल: क्या होगा असर?
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को ऑनलाइन जमा करना सिर्फ़ पहला कदम है। इनकम टैक्स के नियमों के तहत, हर टैक्सपेयर को रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के अंदर उसे वेरिफाई करना अनिवार्य है। अगर यह वेरिफिकेशन नहीं होता, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को अमान्य (invalid) मान लेगा, जिसका मतलब है कि आपने उस फाइनेंशियल ईयर के लिए रिटर्न फाइल ही नहीं किया।
अनवेरिफाइड रिटर्न का वित्तीय नुकसान:
30 दिन की समय-सीमा के बाद अगर रिटर्न वेरिफाई नहीं होता है, तो इसका सीधा असर आपके टैक्स रिफंड पर पड़ता है। सबसे पहले, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट किसी भी टैक्स रिफंड को प्रोसेस नहीं करेगा। अगर आप अतिरिक्त टैक्स कटौती या भुगतान के लिए रिफंड की उम्मीद कर रहे हैं, तो वह अनिश्चित काल के लिए होल्ड पर रख दिया जाएगा। दूसरे, आप अपने बिजनेस या कैपिटल मार्केट निवेशों, जैसे कि शेयर ट्रेडिंग, से हुए किसी भी नुकसान (losses) को भविष्य के सालों में कैरी-फॉरवर्ड करने का कानूनी अधिकार खो देंगे। 'कैरी-फॉरवर्ड' का यह लाभ न मिलना आपके भविष्य के टैक्स बोझ को काफी बढ़ा सकता है।
सेक्शन 234F के तहत जुर्माना:
समय पर वेरिफिकेशन न करने का मतलब है कि आपका रिटर्न सिर्फ़ उस तारीख को फाइल माना जाएगा जिस दिन आप वेरिफिकेशन पूरा करते हैं। अगर यह तारीख तय सीमा के बाद की है, तो इसे लेट फाइलिंग माना जाएगा। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 234F के तहत, लेट फाइलिंग पर जुर्माना लगता है। ₹5 लाख से ज़्यादा की कुल आय वाले टैक्सपेयर्स के लिए यह जुर्माना ₹5,000 तक हो सकता है। ₹5 लाख या उससे कम आय वाले टैक्सपेयर्स के लिए यह जुर्माना ₹1,000 है। इसके अलावा, जब तक रिटर्न अनवेरिफाइड रहता है, तब तक किसी भी बकाया टैक्स देनदारी पर ब्याज भी बढ़ता रहता है।
छूटी हुई समय-सीमा को कैसे संभालें?
अगर आपको पता चलता है कि रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों से ज़्यादा हो गए हैं और आपने वेरिफिकेशन नहीं किया है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन तुरंत कदम उठाना होगा। टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स अथॉरिटीज के साथ ऑनलाइन 'कंडोनेशन ऑफ डिले' (condonation of delay) का अनुरोध फाइल कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में आपको देरी का कारण बताना होगा। अगर अथॉरिटीज आपके स्पष्टीकरण को स्वीकार करती हैं, तो रिटर्न प्रोसेस किया जाएगा, हालांकि लेट फाइलिंग के जुर्माने तब भी लागू होंगे। एक और तरीका यह है कि आप ITR-V (रसीद) की एक फिजिकल कॉपी पर साइन करके उसे स्पीड पोस्ट के ज़रिए बेंगलुरु स्थित सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) भेज सकते हैं।
आम गलतियों से कैसे बचें:
कई टैक्सपेयर्स यह मान लेते हैं कि पोर्टल पर ITR फॉर्म अपलोड करने से काम पूरा हो गया। लेकिन, सिस्टम को एक खास वेरिफिकेशन एक्शन की ज़रूरत होती है, जो आमतौर पर आधार-लिंक्ड OTP या नेट बैंकिंग के ज़रिए होती है। आधार के साथ मोबाइल नंबर अपडेट न होना जैसी तकनीकी समस्याएं भी इस प्रक्रिया को ब्लॉक कर सकती हैं। टैक्सपेयर्स को ई-फाइलिंग पोर्टल पर नियमित रूप से लॉग इन करके अपने रिटर्न की स्थिति (status) जांचनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 'वेरिफाइड' (Verified) मैसेज दिख रहा है। अगर कंडोनेशन के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो एकमात्र विकल्प एक नया रिटर्न फाइल करना हो सकता है, जिस पर अतिरिक्त जांच की जा सकती है।
