Millworks Tech IPO: निवेशकों की लगी लॉटरी! 78 गुना सब्सक्राइब, GMP दे रहा 120% लिस्टिंग गेन के संकेत

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AuthorAditya Rao|Published at:
Millworks Tech IPO: निवेशकों की लगी लॉटरी! 78 गुना सब्सक्राइब, GMP दे रहा 120% लिस्टिंग गेन के संकेत

Millworks Technologies का ₹160 करोड़ का SME IPO आज बंद हो गया और यह **78 गुना** सब्सक्राइब हुआ। रिटेल निवेशकों ने **114 गुना** से ज्यादा बोली लगाकर मांग का नेतृत्व किया। ₹400 के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के साथ, निवेशक लिस्टिंग पर बड़े मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं, हालांकि फाइनल अलॉटमेंट डिमांड-सप्लाई की असल तस्वीर साफ करेगी।

IPO में दिखी निवेशकों की दीवानगी

Millworks Technologies का BSE SME प्लेटफॉर्म पर आया IPO आज, 16 जुलाई को बंद हुआ और निवेशकों ने इसमें जमकर पैसा लगाया। बोली प्रक्रिया के अंत तक, यह शेयर 78 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। कंपनी ने 35.18 लाख इक्विटी शेयर ऑफर किए थे, जबकि एक्सचेंज को 27.29 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बिड मिले। यह कंपनी के प्रिसिजन-मशीन्ड कंपोनेंट्स और असेंबली बिजनेस में निवेशकों की भारी दिलचस्पी दिखाता है।

रिटेल निवेशकों का जलवा

खासकर रिटेल निवेशकों की भागीदारी जबरदस्त रही, जिनका कोटा 114.31 गुना से ज्यादा बुक हुआ। वहीं, हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) यानी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) कैटेगरी में भी 78.08 गुना सब्सक्रिप्शन देखा गया। यह IPO, जिसकी कीमत ₹315 से ₹331 प्रति शेयर के बीच थी, पूरी तरह से फ्रेश इश्यू है। इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई पूरी रकम सीधे कंपनी के खाते में जाएगी, न कि मौजूदा शेयरधारकों को।

कैसा है बिजनेस मॉडल?

Millworks Technologies एयरोस्पेस, डिफेंस, रेलवे और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर के लिए जरूरी कंपोनेंट्स बनाती है। कंपनी 'बिल्ड-टू-प्रिंट' (ग्राहक के डिजाइन फॉलो करना) और 'बिल्ड-टू-स्पेक' (परफॉर्मेंस की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट बनाना) जैसी स्ट्रेटेजी अपनाती है। कंपनी के फाइनेंशियल की बात करें तो FY26 में 73% रेवेन्यू डोमेस्टिक सेल्स से और 27% एक्सपोर्ट से आता है। IPO से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने के लिए नई प्लांट और मशीनरी खरीदने में किया जाएगा, साथ ही वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को भी पूरा किया जाएगा।

ग्रे मार्केट का इशारा और जोखिम

ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹400 के पार है, जो लिस्टिंग पर 120% से ज्यादा के गेन का संकेत देता है। हालांकि, निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। GMP एक अनऑफिशियल इंडिकेटर है और मार्केट सेंटिमेंट के हिसाब से इसमें बड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। SME IPOs में आमतौर पर लॉट साइज बड़ा होता है और लिक्विडिटी कम, जिससे लिस्टिंग के बाद शेयर में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। रिटेल एप्लीकेंट के लिए मिनिमम इन्वेस्टमेंट ₹2,64,800 रखा गया था, जो कंपनी के लॉन्ग-टर्म बिजनेस प्रोस्पेक्ट्स को ध्यान में रखकर निवेश करने की सलाह देता है।

आगे क्या?

कंपनी 17 जुलाई को शेयर अलॉटमेंट फाइनल कर सकती है। सफल एप्लीकेंट्स के डीमैट अकाउंट में शेयर लिस्टिंग से पहले 21 जुलाई तक क्रेडिट हो जाएंगे, जब कंपनी BSE SME एक्सचेंज पर लिस्ट होगी। लिस्टिंग के बाद, निवेशकों को कंपनी की नई पूंजी का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे जटिल सेक्टर में ऑपरेशन स्केल करने में प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन टाइमलाइन और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स बनाए रखने जैसे जोखिम शामिल हैं।

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