टाटा ट्रस्ट के बोर्ड से हटाए जाने के बाद मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने न केवल प्रक्रिया में खामियां निकाली हैं, बल्कि चेयरमैन नोएल टाटा की नियुक्ति की पात्रता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
टाटा ग्रुप की दिग्गज संस्थाओं, Sir Dorabji Tata Trust और Bai Hirabai Jamsetji Tata Navsari Charitable Institution में गवर्नेंस का विवाद गहरा गया है। मेहली मिस्त्री ने अपनी बेदखली को गलत बताते हुए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास याचिका दायर की है। उनका दावा है कि उनका कार्यकाल अक्टूबर 2025 में खत्म नहीं हुआ था, जैसा कि ट्रस्ट का दावा है।
वोटिंग प्रक्रिया पर सवाल
विवाद का मुख्य केंद्र वह वोटिंग है जिसने मिस्त्री की पुनर्नियुक्ति को रोक दिया था। मिस्त्री का आरोप है कि इस वोटिंग प्रक्रिया में वेणु श्रीनिवासन ने भी हिस्सा लिया, जबकि उनका खुद का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में ही समाप्त हो चुका था। ऐसे में बोर्ड मीटिंग के कोरम और फैसलों की वैधता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
नोएल टाटा की एलिजिबिलिटी पर संशय
मिस्त्री ने 1923 के Bai Hirabai Trust Deed का हवाला देते हुए चेयरमैन नोएल टाटा की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्रस्ट डीड की शर्तों, जिसमें नागरिकता, दुबई (UAE) में रेजिडेंसी और धार्मिक प्राथमिकताओं का जिक्र है, के आधार पर नोएल टाटा की पात्रता की समीक्षा की मांग की है।
ट्रस्ट का क्या है रुख?
दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट्स ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि मिस्त्री का कार्यकाल 28 अक्टूबर 2025 को आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुका है, इसलिए उन्हें बोर्ड के फैसलों को चुनौती देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यह मामला अब रेगुलेटरी जांच के दायरे में है, जिसकी अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को तय की गई है।
