मेघालय सरकार कोयला खदानों के संचालन के लिए केंद्र से मंजूरी चाहती है। सीएम कॉनराड संगमा ने केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात कर MMDR एक्ट के तहत शक्तियों के हस्तांतरण की मांग की है। इसका मकसद छोटे आदिवासी खनिकों को कानूनी पट्टे दिलाना और 2014 में लगी पाबंदी के बाद खत्म हुई आजीविका को फिर से शुरू करना है, साथ ही राज्य के राजस्व को बढ़ाना है। हालांकि, पर्यावरण को नुकसान और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं भी जताई जा रही हैं।
कोयला खनन को मिलेगी नई रफ्तार?
मेघालय सरकार राज्य में टेक्नोलॉजी-आधारित कोयला खनन (Coal Mining) के लिए केंद्र सरकार से मंज़ूरी लेने की कोशिश में है। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात की और उनसे Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 की धारा 26 के तहत राज्य में खनन योजनाओं को मंजूरी देने की शक्तियों को सौंपने का आग्रह किया है।
कानूनी और व्यावहारिक अड़चनें
इस कदम का मुख्य उद्देश्य हजारों छोटे आदिवासी कोयला खनिकों के संचालन को कानूनी जामा पहनाना है। मेघालय में जमीन और खनिज अधिकार आमतौर पर व्यक्तियों, कुलों या समुदायों के पास होते हैं, न कि राज्य के पास। यह राष्ट्रीय खनन मॉडल से अलग है, जिसे मुख्यमंत्री संगमा का तर्क है कि यह राज्य के छोटे-छोटे कोयला भंडार के लिए उपयुक्त नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले ने आदिवासी भूमि और खनिजों के स्वामित्व की पुष्टि की थी, लेकिन MMDR एक्ट के अनुपालन को भी अनिवार्य बनाया था।
आर्थिक और पर्यावरणीय चिंताएं
साल 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा 'रैट-होल माइनिंग' पर प्रतिबंध लगने के बाद से, छोटे पैमाने पर कोयला निकालने पर निर्भर कई परिवार अपनी आजीविका खो चुके हैं। इसके अलावा, राज्य को रॉयल्टी, उपकर (Cess) और करों से होने वाली महत्वपूर्ण आय का भी नुकसान हुआ है। 2021 में लागू की गई न्यूनतम 100 हेक्टेयर की पट्टे क्षेत्र की पिछली आवश्यकता ने प्रभावी रूप से अधिकांश वास्तविक छोटे कोयला धारकों को बाहर कर दिया था। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि छोटे खनिकों के लिए दिल्ली और कोलकाता में मामूली भंडारों के लिए मंजूरी लेना कितना अव्यावहारिक और महंगा है।
तकनीकी समाधान का प्रस्ताव
राज्य सरकार आधुनिक तकनीक, जिसमें सुरक्षित प्रवेश बिंदुओं और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए 3D मैपिंग शामिल है, का उपयोग करके सुरंग खनन (Tunnel Mining) की व्यवहार्यता की जांच कर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली किफायती मशीनरी और तकनीकों पर विचार किया जा रहा है ताकि जोखिमों को कम किया जा सके, क्योंकि ओपन-कास्ट माइनिंग को अव्यावहारिक माना जा रहा है। राज्य भर में अनुमानित 22,000 खदानों वाले वर्तमान ढांचे को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना मुश्किल माना जा रहा है।
कार्यकर्ताओं का विरोध
हालांकि, कार्यकर्ता इस योजना को लेकर शंकित हैं। महिला अधिकार कार्यकर्ता एग्नेस खारशिंग ने योजना की व्यवहार्यता पर सवाल उठाया और मेघालय के नाजुक पहाड़ों को व्यापक पर्यावरणीय क्षति की चेतावनी दी। उन्होंने अवैध खनन जारी रहने का भी आरोप लगाया, जिससे स्थानीय समुदाय पहले से ही प्रदूषित पानी और क्षतिग्रस्त कृषि भूमि से पीड़ित हैं। खारशिंग ने एक पारदर्शी योजना की आवश्यकता पर जोर दिया जो स्थानीय आजीविका की रक्षा करे और भूमि पर कब्जे को रोके, जिसका खाका राज्य सरकार को अभी पूरी तरह से प्रस्तुत करना बाकी है।
