Meesho Tax Woes: ₹2,000 करोड़ से ज़्यादा के टैक्स विवाद, FY26 में कंपनी पर बढ़ी देनदारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Meesho Tax Woes: ₹2,000 करोड़ से ज़्यादा के टैक्स विवाद, FY26 में कंपनी पर बढ़ी देनदारी

ई-कॉमर्स कंपनी Meesho के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। कंपनी पर इनकम टैक्स विभाग की ओर से **₹2,071 करोड़** से ज़्यादा के टैक्स क्लेम का बोझ आ गया है। यह मामला हालिया टैक्स असेसमेंट के बाद सामने आया है।

क्या है पूरा मामला?

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Meesho ने बताया है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 (जो मार्च 2026 में खत्म हुआ) के लिए टैक्स से जुड़े विवादों में कुल ₹2,071.8 करोड़ की मांग की गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नए असेसमेंट के बाद कंपनी पर यह देनदारी बढ़ी है, जिससे कंपनी के लिए एक जटिल कानूनी स्थिति बन गई है। कंपनी दिसंबर 2025 से स्टॉक मार्केट में लिस्टेड है।

ये टैक्स विवाद मुख्य रूप से दो असेसमेंट ईयर से जुड़े हैं। कंपनी को असेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए ₹1,499.7 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस मिला है। इससे पहले, असेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए ₹572 करोड़ का नोटिस जारी हुआ था। इन इनकम टैक्स मामलों के अलावा, अप्रैल 2026 में कंपनी को ₹14.29 करोड़ का एक अलग GST डिमांड भी झेलना पड़ा है। यह मामला कंपनी के रीसेलर-आधारित बिजनेस मॉडल के लिए Tax Collected at Source (TCS) नियमों से जुड़ा था।

कंपनी की रणनीति और वित्तीय प्रदर्शन

Meesho ने यह साफ किया है कि वह इन टैक्स डिमांड्स का पुरजोर विरोध कर रही है। कंपनी ने सुधार के लिए रिक्वेस्ट फाइल की है और दिल्ली में नेशनल फेसलेस अपील सेंटर (National Faceless Appeal Centre) में अपील दायर की है। कंपनी का कहना है कि इन टैक्स डिमांड्स का उसके वित्तीय स्वास्थ्य पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह कानूनी रास्ते अपना रही है।

यह टैक्स चुनौतियां ऐसे समय में आई हैं जब कंपनी शानदार ऑपरेशनल ग्रोथ दिखा रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, Meesho ने ₹12,626 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 35% ज़्यादा है। इसके साथ ही, कंपनी अपने घाटे को कम करने में भी कामयाब रही है, FY26 में ₹1,358 करोड़ का लॉस रिपोर्ट किया है, जो FY25 के ₹3,942 करोड़ के लॉस से काफी बेहतर है। कंपनी ने इस बेहतर प्रदर्शन का श्रेय ज़्यादा यूजर एक्विजिशन और बड़े सेलर बेस को दिया है।

निवेशक क्यों रखते हैं टैक्स लिटिगेशन पर नज़र?

इन विवादों का मुख्य कारण अक्सर कस्टमर डिस्काउंट, प्रमोशनल इंसेंटिव्स और रीसेलर ट्रांजेक्शन पर TCS के टैक्स ट्रीटमेंट को लेकर होता है। ई-कॉमर्स सेक्टर में यह एक आम जांच का विषय है, जहां बिजनेस मॉडल यूजर ग्रोथ बढ़ाने के लिए भारी डिस्काउंट और कैशबैक पर निर्भर करते हैं। निवेशकों के लिए चिंता तुरंत इन पैसों के भुगतान की नहीं, बल्कि भविष्य की टैक्स देनदारियों और कानूनी लड़ाई में हार की स्थिति में संभावित कैश फ्लो पर असर की है।

शेयरधारकों के लिए आगे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चल रही कानूनी अपीलों का नतीजा होगा। इस बात पर अपडेट कि कंपनी को नेशनल फेसलेस अपील सेंटर या उच्च न्यायालयों से राहत मिलती है या नहीं, यह कंपनी की वित्तीय फ्लेक्सिबिलिटी पर अंतिम प्रभाव तय करने में महत्वपूर्ण होगा। निवेशक भविष्य के फाइनेंशियल ईयर में ऐसे विवादों से बचने के लिए कंपनी के मैनेजमेंट द्वारा टैक्स नियमों के साथ अपने ऑपरेशनल मॉडल को कैसे संरेखित करने की योजना पर भी नज़र रख सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.