एक्टिविस्ट Manoj Jarange ने महाराष्ट्र सरकार को 11 सितंबर तक की मोहलत दी है। मराठा समुदाय के लिए कुनबी कास्ट सर्टिफिकेट की मांग को लेकर अगर समझौता नहीं हुआ, तो 12 सितंबर से मुंबई की ओर बड़ा आंदोलन शुरू होगा, जिससे बिजनेस ऑपरेशन्स पर असर पड़ने की आशंका है।
मराठा रिजर्वेशन आंदोलन के प्रमुख चेहरा Manoj Jarange ने महाराष्ट्र सरकार को 11 सितंबर, 2026 तक का आखिरी अल्टीमेटम दे दिया है। फिलहाल अंतरवाली सराटी में अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तो 12 सितंबर को वे मुंबई की ओर कूच करेंगे। इस घोषणा के बाद से राज्य में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच अब तक हुई बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
मुख्य मांग और सरकारी जवाब
आंदोलन की सबसे बड़ी मांग मराठों को ओबीसी (OBC) कैटेगरी में शामिल करने और उन्हें कुनबी कास्ट सर्टिफिकेट जारी करने की है। राज्य सरकार की तरफ से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत ने एक डेलीगेशन के जरिए जानकारी दी है कि सरकार ने लगभग 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स की पहचान कर ली है और सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। हालांकि, एक्टिविस्ट अभी भी इस पर कानूनी और प्रशासनिक गारंटियों की मांग कर रहे हैं, जिससे गतिरोध बना हुआ है।
बिजनेस और ऑपरेशनल रिस्क
महाराष्ट्र के कई हिस्सों, विशेष रूप से बीड, लातूर और धाराशिव जैसे जिलों में पिछले कुछ दिनों से हो रहे प्रदर्शनों ने बिजनेस एक्टिविटी को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। रोड ब्लॉक और लोकल शटडाउन की वजह से ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स में बाधा आ रही है।
निवेशकों और बाजार के जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि क्या 11 सितंबर की डेडलाइन से पहले सरकार और एक्टिविस्ट के बीच कोई समाधान निकलता है। अगर मामला मुंबई की ओर बढ़ता है, तो राज्य की कमर्शियल कैपिटल में सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बड़े बदलाव की संभावना है, जो शॉर्ट टर्म में बिजनेस ऑपरेशन्स को प्रभावित कर सकते हैं।
