Manipur Ethnic Tensions: बढ़ता तनाव और इकॉनमी को ₹1,200 करोड़ का बड़ा झटका

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AuthorAditya Rao|Published at:
Manipur Ethnic Tensions: बढ़ता तनाव और इकॉनमी को ₹1,200 करोड़ का बड़ा झटका

Manipur में जातीय संघर्ष का दायरा अब मेइतेई-कुकी से आगे बढ़कर कुकी-नागा समुदायों तक पहुंच गया है। इस अस्थिरता ने राज्य की आर्थिक नींव को हिला दिया है, जहां मई 2023 से अब तक जीएसटी (GST) कलेक्शन में **₹1,200 करोड़** का नुकसान हुआ है।

राज्य में सुरक्षा और आर्थिक हालात एक जटिल मोड़ पर पहुंच गए हैं। अक्टूबर 2026 में कामजोंग, कांगपोकपी और उखरुल जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच ताजा झड़पों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस तनातनी का सीधा असर सरकारी खजाने और स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है।

सरकारी खजाने पर भारी असर

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के अनुसार, 2023 से 2026 के बीच राज्य को ₹1,200 करोड़ के जीएसटी रेवेन्यू का नुकसान झेलना पड़ा है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बंद और हाईवे ब्लॉकडेज के कारण रोजाना औसतन ₹20 करोड़ से ₹25 करोड़ का नुकसान हो रहा है।

स्थानीय व्यापार और सप्लाई चेन की कमर टूटी

लंबे समय से जारी अशांति ने राज्य की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कृषि, मत्स्य पालन, कपड़ा और पर्यटन जैसे मुख्य सेक्टर फिलहाल ठप पड़े हैं। कई सूक्ष्म उद्योग (Micro-industries) तो पूरी तरह से बंद होने की कगार पर हैं।

आगे की राह

प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बहाल करना है। अब जबकि यह संघर्ष तीन-पक्षीय (मेइतेई, कुकी और नागा) हो चुका है, शांति वार्ता की राह और भी मुश्किल हो गई है। राज्य की रिकवरी अब पूरी तरह से ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को सुरक्षित करने और अनिश्चितकालीन बंद को कम करने पर टिकी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.