चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर पिछले **23 वर्षों** के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर भारी बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। नदी के बढ़ते पानी के कारण यातायात के मुख्य मार्ग बंद कर दिए गए हैं और स्थानीय व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है।
तबाही का मंजर
चित्रकूट में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर 23 साल के रिकॉर्ड को पार कर गया है। बाढ़ का पानी ऐतिहासिक रामघाट समेत कई रिहायशी और कमर्शियल इलाकों में घुस गया है, जिससे स्थानीय लोगों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।
ट्रांसपोर्ट पर असर
इस आपदा का सबसे बड़ा असर लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर पड़ा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले प्रमुख नेशनल हाईवे और स्थानीय सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। पुलों के पास सुरक्षा खतरों को देखते हुए यातायात को फिलहाल प्रतिबंधित कर दिया गया है।
राहत और बचाव कार्य
स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन ने NDRF और SDRF की टीमों को तैनात कर दिया है। राहत कार्य में तेजी लाते हुए प्रशासन ने 400 से ज्यादा फ्लड आउटपोस्ट बनाए हैं। मुख्य फोकस निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचाने पर है।
हालांकि यह एक क्षेत्रीय प्राकृतिक आपदा है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की इस बर्बादी से माल ढुलाई और सेवाओं के आवागमन में देरी निश्चित है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान पानी के स्तर को मॉनिटर करने और राहत कार्य को सुचारू रूप से चलाने पर है, जबकि आगे भी बारिश का अलर्ट बना हुआ है।
