महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक सरकारी आश्रम स्कूल के **59** वर्षीय रसोइये को **22** छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। चौकाने वाली बात यह है कि आरोपी पहले भी POCSO एक्ट के तहत केस का सामना कर चुका है, फिर भी उसे नौकरी पर रखा गया था।
महाराष्ट्र के शाहपुर, ठाणे जिले के सरकारी आश्रम स्कूल में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। पुलिस ने 59 वर्षीय आरोपी गणपत गवली को गिरफ्तार किया है, जिस पर कक्षा 6 से 10 तक की 22 छात्राओं ने लगातार अनुचित शारीरिक संपर्क और शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सिस्टम की घोर लापरवाही
यह मामला सीधे तौर पर आदिवासी विकास विभाग (Tribal Development Department) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। जांच में पता चला है कि आरोपी गवली पर साल 2024 में भी एक अन्य संस्थान में POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। इन सब के बावजूद, उसे स्कूल में काम पर रखना प्रशासन की गंभीर चूक को दर्शाता है।
अधीक्षक की भूमिका भी संदेह के घेरे में
आरोप है कि स्कूल के अधीक्षक ने छात्राओं की शिकायतों को न केवल नजरअंदाज किया, बल्कि शिकायत करने वाली छात्राओं के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार भी अपनाया। फिलहाल, सहायक आदिवासी विकास परियोजना अधिकारी बी.आर. जाधव ने बताया है कि आरोपी की पुनर्नियुक्ति को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा की जा रही है।
आगे की जांच
उप-विभागीय पुलिस अधिकारी विशाल नागरगोजे के नेतृत्व में जांच चल रही है। अब सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर एक पूर्व में आरोपी व्यक्ति को नाबालिगों के बीच काम करने दिया गया। विभाग पर अब भर्ती प्रक्रियाओं की कड़ी जांच करने और जवाबदेही तय करने का भारी दबाव है।
