महाराष्ट्र के कोंडिवडे गांव की तीन 15-वर्षीय छात्राओं ने अपनी खस्ताहाल सड़क को लेकर एक व्यंग्यात्मक वीडियो बनाया, जो वायरल हो गया। इस वीडियो के बाद स्थानीय अधिकारियों ने सड़क की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इस पहल ने डिजिटल माध्यमों से त्वरित नागरिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में इनकी प्रभावशीलता को उजागर किया है।
तीन छात्राओं ने जगाई प्रशासन में सुगबुगाहट
कोंडिवडे गांव, महाराष्ट्र की तीन 10वीं कक्षा की छात्राओं - नेहा घारे, ज्योत्सना मुकाने और मानसी पवार - ने अपने स्कूल, नयन मकरंद विद्यालय, तक आने वाली खस्ताहाल खान्दपे-कोंडिवडे सड़क की बदहाली को उजागर करने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने केवल 40 सेकंड का एक व्यंग्यात्मक वीडियो बनाया, जिसमें वे एक छाता को माइक बनाकर किसी न्यूज़ रिपोर्टर की तरह सड़क की स्थिति का वर्णन कर रही थीं।
वायरल हुआ वीडियो, हरकत में आया प्रशासन
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में छात्राओं ने मॉनसून के दौरान सड़क पर बने गड्ढों और कीचड़ के कारण होने वाली दैनिक परेशानियों को दर्शाया था। आम तौर पर, ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई में काफी समय लगता है, लेकिन इस डिजिटल विरोध ने स्थानीय प्रशासन का ध्यान तुरंत खींचा।
वीडियो के व्यापक प्रसार के बाद, स्थानीय विधायक महेंद्र थोरवे ने जनता की आवाज पर ध्यान देते हुए उपेक्षित सड़क पर मरम्मत कार्य शुरू करवाया। यह घटना इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे स्थानीय मुद्दों को सामने लाने के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग नागरिकों और अधिकारियों के बीच की खाई को पाट सकता है और आवश्यक बुनियादी ढांचे के मुद्दों पर समय पर कार्रवाई करवा सकता है।
