NCP नेता सुनेत्रा पवार ने मुंबई में विधायकों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। दिल्ली में अमित शाह के साथ पार्टी के सीनियर नेताओं की मुलाकात के बाद मची इस हलचल से महायुति गठबंधन की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं।
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। NCP की लीडरशिप ने पार्टी के भीतर जारी संगठनात्मक गतिविधियों को देखते हुए एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने आज मुंबई स्थित अपने आवास पर पार्टी के विधायक दल की बैठक बुलाई है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब पार्टी के शीर्ष नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चुका है।
क्या है विवाद की जड़?
राजनीतिक जानकारों की नजरें प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल के उस दिल्ली दौरे पर टिकी हैं, जहां उन्होंने अमित शाह के साथ बंद कमरे में बातचीत की। चर्चा इस बात की है कि इस प्रतिनिधिमंडल में सुनेत्रा पवार और उनके परिवार को शामिल न किए जाने के बाद से पार्टी के भीतर गुटबाजी या संभावित विलय की अटकलें तेज हो गई हैं। ये कयास साल 2026 की शुरुआत से ही जारी हैं, जो पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद और गहरा गए हैं।
पार्टी का क्या है पक्ष?
बढ़ती अटकलों को देखते हुए NCP के राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेश पाटिल ने अंदरूनी कलह की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी का आधिकारिक बयान है कि दिल्ली दौरा पहले से तय था और यह केवल संगठनात्मक विषयों पर चर्चा के लिए था। पार्टी के अनुसार, सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर कोई खतरा नहीं है और NCP अपने सहयोगी दलों के साथ महायुति में पूरी तरह मजबूती से खड़ी है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
हालांकि यह कोई कॉर्पोरेट घटना नहीं है और इसका शेयरों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन महाराष्ट्र जैसे बड़े औद्योगिक हब के लिए सरकार की स्थिरता बेहद मायने रखती है। बिजनेस जगत हमेशा गठबंधन की स्थिरता को बारीकी से देखता है, क्योंकि इसी पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, नीतिगत फैसलों और औद्योगिक मंजूरियों की गति निर्भर करती है। फिलहाल बाजार की नजरें इस बैठक के नतीजों और विधायकों की मौजूदगी पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि गठबंधन का भविष्य क्या है।
