Legislative Council चुनावों में हार के बाद Maharashtra की महायुति सरकार में तनाव बढ़ गया है। Shiv Sena के बयानों और BJP के पलटवार ने राज्य के पॉलिटिकल माहौल को गरमा दिया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के भीतर 23 अक्टूबर को घोषित हुए लेजिस्लेटिव काउंसिल के चुनावी नतीजों के बाद से काफी घमासान मचा हुआ है। इन चुनावों में विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन ने 5 में से 3 सीटों पर जीत हासिल की है, जिसने सत्तारूढ़ गठबंधन के अंदर आपसी कलह को सतह पर ला दिया है।\n\nनतीजों के बाद शिव सेना के कुछ नेताओं ने राज्य के नेतृत्व में बदलाव की मांग करते हुए Eknath Shinde को मुख्यमंत्री पद पर बनाए रखने की पैरवी की, जिस पर BJP ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। BJP का साफ कहना है कि 2024 के विधानसभा चुनावों का जनादेश ही सरकार का आधार है, जिसमें पार्टी को भारी बहुमत मिला था।\n\n### बिजनेस और इन्वेस्टमेंट पर असर\n\nनिवेशकों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र भारत की जीडीपी (GDP), मैन्युफैक्चरिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर का सबसे बड़ा केंद्र है। सरकार में स्थिरता और आपसी तालमेल का सीधा असर प्रशासनिक फैसलों पर पड़ता है। यदि गठबंधन में इसी तरह की खींचतान जारी रहती है, तो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्रियल लैंड अलॉटमेंट और अन्य महत्वपूर्ण पॉलिसी फैसलों में देरी होने की आशंका बनी रहती है।\n\nइसके अलावा, BJP ने पुणे और नागपुर जैसे जिलों में चुनाव के दौरान कोऑर्डिनेशन में विफलता का मुद्दा भी उठाया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सरकार अपनी आंतरिक कलह को जल्द नहीं सुलझाती, तो आने वाले समय में राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या गठबंधन के नेता आपसी विवाद को सुलझाकर वापस काम पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
