महाराष्ट्र में सत्ता का खेल: NCP के भीतर मची खलबली
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में आंतरिक कलह ने महायुति गठबंधन की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अचानक निधन से पैदा हुई नेतृत्व की खाली जगह को भरना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही है। सुनीता पवार, जो उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने और केंद्रीय नेतृत्व संभालने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें पार्टी के पुराने नेताओं से लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
सत्ता के इस केंद्रीकरण में विफलता के कारण पीढ़ीगत तनाव खुलकर सामने आ गया है। पवार परिवार की नई पीढ़ी के पार्टी के कार्यकारी पदों पर आने से वरिष्ठ नेता नाराज हैं। इस अंदरूनी रस्साकशी के चलते पार्टी फिलहाल कमजोर नजर आ रही है, जिसका फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) उठा रही है। महाराष्ट्र में सत्ताधारी पार्टी के तौर पर BJP गठबंधन के नियमों को तय करने की स्थिति में आ गई है।
ओडिशा में BJP की नई चाल
महाराष्ट्र के अलावा, ओडिशा में भी राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। हाल ही में बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सांसद, देबाशीष सामंतराय का BJP में शामिल होना, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस कदम के दोहरे फायदे हैं - पहला, यह पार्टी के उच्च सदन (Upper House) के वोटिंग ब्लॉक को मजबूत करता है। दूसरा, यह NEET-UG परीक्षा की शुचिता को लेकर चल रहे विवादों से ध्यान भटकाने का काम करता है।
इस कदम की खासियत यह है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जैसे राज्य नेतृत्व को भी इसकी भनक लगने से पहले ही यह तय हो गया था। यह दिखाता है कि दिल्ली से पार्टी का निर्णय लेने का तरीका बदल रहा है और राज्य के नेताओं को यह संकेत मिल रहा है कि उनका भविष्य केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन करने पर निर्भर करेगा, न कि क्षेत्रीय जनाधार पर।
विपक्ष की कमजोर पड़ती पकड़
असम में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का कानून बनना BJP के एजेंडे को आगे बढ़ाने का एक और कदम है। लेकिन इसके साथ ही, विपक्ष के भीतर की दरारें भी साफ नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जिस तरह से कांग्रेस की चुनावी विफलताओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की है, उससे लगता है कि सरकार के पास विपक्ष के अंदरूनी रिसर्च और कम्युनिकेशन विंग तक की जानकारी है।
सरमा ने यह भी खुलासा किया कि UCC पर कांग्रेस के आंतरिक मुद्दे BJP नेतृत्व तक पहुंच रहे थे। इस खुलासे ने विपक्षी खेमे में अंदरूनी सूत्रों का पता लगाने या बागियों की पहचान करने का दबाव बढ़ा दिया है। यह स्थिति कांग्रेस पार्टी के रणनीतिक कामकाज को पंगु बना सकती है और देश भर की कई राज्य विधानसभाओं में मौजूदा सरकार के विधायी एजेंडे को और मजबूत कर सकती है।
