Maharashtra Maritime Board की ओर से मुंबई के तटों पर **29** फ्लोटिंग और लैंड-बेस्ड LED बिलबोर्ड लगाने की योजना भारी विरोध के चलते अटक गई है। स्थानीय लोग और पर्यावरणविद इसे CRZ नियमों का उल्लंघन बता रहे हैं।
Maharashtra Maritime Board (MMB) का मुंबई की तटरेखा पर फ्लोटिंग LED विज्ञापन और होर्डिंग्स लगाने का प्रस्ताव अब मुश्किल में नजर आ रहा है। सितंबर 2026 में बोर्ड ने 19 साइटों पर 29 विज्ञापन संरचनाएं लगाने के लिए टेंडर जारी किए थे, जिसका मकसद बंदरगाह और जल परिवहन के लिए फंड जुटाना था। इस पूरे प्रोजेक्ट को DBFOM (Design, Build, Finance, Operate and Maintain) मॉडल पर तैयार किया जाना था।
विरोध और विवाद की मुख्य वजहें
इस योजना का शहरी योजनाकारों, निवासियों और पर्यावरणविदों ने कड़ा विरोध किया है। आदित्य ठाकरे जैसे नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। मुख्य आपत्तियों में शामिल हैं:
- विजुअल पॉल्यूशन: जुहू बीच, बांद्रा-वर्ली सी लिंक और वर्ली जेटी जैसे इलाकों की सुंदरता पर असर पड़ने की आशंका।
- पर्यावरण को खतरा: विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक चमकदार LED लाइटें समुद्री जीवों के लिए खतरनाक हैं। यह लाइट पानी के काफी नीचे तक जा सकती है, जिससे समुद्री जीवों की फीडिंग और माइग्रेशन की आदतों पर बुरा असर पड़ेगा।
कानूनी पेंच और भविष्य
सबसे बड़ा झटका इसे कानूनी मोर्चे पर लगा है। आलोचकों का आरोप है कि ये विज्ञापन बोर्ड लगाने का काम Coastal Regulation Zone (CRZ-IV) के नियमों का उल्लंघन करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल इस प्रोजेक्ट के पास जरूरी पर्यावरणीय और तटीय मंजूरी (Clearances) का अभाव है।
चूंकि MMB एक सरकारी इकाई है, इसलिए इसका शेयर बाजार पर सीधा असर नहीं है। हालांकि, मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट और बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है। प्रोजेक्ट के पास जरूरी परमिट नहीं होने के कारण, इसके रद्द होने या लंबे समय तक लटकने का खतरा काफी अधिक बना हुआ है।
