पेपर लीक विवादों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता एडिशनल चीफ सेक्रेटरी V. Radha कर रही हैं, और सरकार अगस्त 2027 तक कंप्यूटर-आधारित परीक्षा और 25,000 सुरक्षित क्लासरूम बनाने की योजना पर काम कर रही है।
सुरक्षा और सिस्टम में बदलाव
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को फिर से बहाल करने के लिए कमर कस ली है। डिप्टी सीएम Devendra Fadnavis की अध्यक्षता में हुए फैसले के बाद, एक हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है, जिसमें पुलिस, IT विभाग और नासिक डिविजनल कमिश्नर ऑफिस के अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी पेपर ड्राफ्टिंग से लेकर रिजल्ट डिक्लेरेशन तक पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच करेगी।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
इस सुधार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अगस्त 2027 तक कंप्यूटर-आधारित टेस्टिंग (CBT) पर स्विच करना है। इसके लिए राज्य भर में 25,000 ऐसे क्लासरूम तैयार किए जाएंगे, जो पूरी तरह से सर्विलांस (Surveillance) से लैस होंगे।
इन्वेस्टर्स के लिए यह एक बड़े अवसर का संकेत है। इस प्रोजेक्ट के लिए IT सर्विसेज, डिजिटल टेस्टिंग प्लेटफॉर्म और हाई-एंड सिक्योरिटी हार्डवेयर कंपनियों को बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिल सकते हैं। सरकार का यह कदम भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर की ओर इशारा करता है।
चुनौतियां और रिस्क
इतने बड़े पैमाने पर बदलाव करना चुनौतीपूर्ण होगा। सिस्टम को पूरी तरह से 'टैंपर-प्रूफ' बनाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होगी। साथ ही, 25,000 क्लासरूम का निर्माण और बजट का सही आवंटन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें कमेटी की सिफारिशों और आने वाले टेंडर्स पर टिकी हैं।
