महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने ठाणे में 11 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर छापेमारी कर **₹20.48 लाख** का खाद्य पदार्थ जब्त किया है। यह कार्रवाई राज्य में फूड सेफ्टी और हाइजीन नियमों के प्रति सख्त रेगुलेटरी रुख को दर्शाती है।
महाराष्ट्र FDA ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए ठाणे के शिल-दिवा स्थित खारडी गांव में 11 फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर छापेमारी की है। इस ऑपरेशन में लगभग 28,955 किलो ठोस खाद्य पदार्थ और 56 लीटर तेल जब्त किया गया, जिसकी कुल कीमत ₹20.48 लाख आंकी गई है। जब्त किए गए सामान में आलू के वेफर्स, फरसान, चिवड़ा, केले के चिप्स और विभिन्न प्रकार के आटे शामिल हैं।
छापेमारी की मुख्य वजह
इंस्पेक्शन के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ये यूनिट्स बेहद अस्वच्छ स्थितियों में काम कर रही थीं। यहाँ उत्पादन फ्लोर पर गंदगी और कीड़ों का प्रकोप मिला। साथ ही, कई यूनिट्स बिना वैध फूड लाइसेंस और उचित लेबलिंग के चल रही थीं। यह छापेमारी FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में चल रहे राज्यव्यापी 'Safe Food, Safe Medicine, Safe Maharashtra' अभियान का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों के नजरिए से देखें, तो यह घटना फूड प्रोसेसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर के लिए सख्त रेगुलेटरी माहौल का संकेत है। हालांकि अभी यह कार्रवाई छोटे और असंगठित सेक्टर पर केंद्रित है, लेकिन नियमों का सख्त पालन भविष्य में छोटी कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। इससे संगठित क्षेत्र (Organized Sector) को मजबूती मिल सकती है और मार्केट में कंसोलिडेशन की संभावना बढ़ सकती है।
अब पब्लिक इवेंट्स पर भी नजर
FDA ने अब सार्वजनिक भोज या मास फूड डिस्ट्रीब्यूशन के लिए नए प्रोटोकॉल जारी किए हैं। आयोजकों को अब कार्यक्रम से कम से कम 7 दिन पहले सूचित करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य अस्थायी खाद्य तैयारी स्थलों की जांच करना है, ताकि फूड पॉइजनिंग के खतरों को कम किया जा सके। फूड सेक्टर में निवेश करने वालों को अब यह देखना होगा कि क्या यह सख्ती आगे चलकर बड़ी सप्लाई चेन को भी प्रभावित करती है या नहीं।
