महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने अपने ट्रांसफर की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ किया है कि वह FDA के प्रमुख के रूप में काम जारी रखेंगे। इससे यह स्पष्ट है कि राज्य में होटल और फार्मा सेक्टर पर रेगुलेटरी सख्ती और छापेमारी का दौर थमेगा नहीं।
क्या है पूरा मामला?
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंडे को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। दरअसल, उन्हें MPSC में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए गठित समिति का सचिव नियुक्त किया गया था, जिसके बाद चर्चा थी कि उन्हें FDA से हटाया जा सकता है। मुंडे ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए साफ किया है कि वह दोनों ही जिम्मेदारियों को बखूबी संभालेंगे।
बिजनेस पर कैसा होगा असर?
मुंडे का कार्यकाल अपनी ताबड़तोड़ छापेमारी और सख्त नियमों के लिए चर्चा में रहा है। हाइजीन (Hygiene), लाइसेंस और मिलावटखोरी के खिलाफ FDA ने जो मोर्चा खोल रखा है, वह आगे भी जारी रहेगा। राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है कि जनता की सुरक्षा और नियमों के पालन में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
रेस्टोरेंट और फार्मा कंपनियों के लिए चेतावनी
हालांकि, FDA की इस आक्रामक कार्यशैली से हॉस्पिटैलिटी और रेस्टोरेंट सेक्टर के कारोबारियों में थोड़ी चिंता है। कई बिजनेस मालिकों का कहना है कि लगातार हो रही जांच से कामकाज में बाधा आ रही है। लेकिन, पूर्व जज दिलीप भोंसले की अध्यक्षता वाली जांच समिति के साथ मुंडे की नियुक्ति के बावजूद, FDA के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
अब साफ है कि महाराष्ट्र में काम करने वाली फूड और फार्मा कंपनियों को अपने कंप्लायंस (Compliance) को लेकर और भी सतर्क रहना होगा। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि राज्य में रेगुलेटरी एनवायरमेंट बेहद सख्त बना रहेगा।
