महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी S Chockalingam ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची (voter rolls) को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए अतिरिक्त अधिकार मांगे हैं। ड्राफ्ट सूची में **21.1%** की भारी गिरावट के बाद यह कदम उठाया गया है, ताकि marginalized वर्गों के पंजीकरण में आ रही दिक्कतों को दूर किया जा सके।
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी S Chockalingam ने 24 सितंबर को चुनाव आयोग (Election Commission of India) को एक औपचारिक पत्र लिखकर राज्य के स्थानीय चुनाव अधिकारियों को अधिक स्वायत्तता देने की मांग की है। इस अपील का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म 'ECINet' पर छोटे फैसलों के लिए बार-बार ऊपर से मंजूरी लेने की मजबूरी को खत्म करना है।
क्यों पड़ी मांग की जरूरत?
31 अगस्त को जारी हुई ड्राफ्ट रोल में पिछली बार के मुकाबले कुल मतदाताओं की संख्या में 21.1 प्रतिशत की कमी देखी गई थी। हालांकि, इसका एक कारण डुप्लीकेट नामों को हटाना हो सकता है, लेकिन इतनी बड़ी गिरावट ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। राज्य चुनाव कार्यालय के अनुसार, आदिवासी समुदाय, बेघर लोगों और अन्य कमजोर वर्गों को रजिस्ट्रेशन के लिए 13 तरह के जरूरी दस्तावेज जुटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
क्या बदलाव चाहते हैं अधिकारी?
प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए चुनाव कार्यालय ने कई सुधार प्रस्तावित किए हैं:
- दस्तावेजों की सूची बढ़ाना: सत्यापन प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के लिए वैध दस्तावेजों का दायरा बढ़ाना।
- व्यक्तिगत सुनवाई से छूट: यदि मतदाता पहचान का संतोषजनक सबूत देता है, तो स्थानीय अधिकारियों को उसे 'पर्सनल हियरिंग' से छूट देने का अधिकार हो।
- आंतरिक समाधान: छोटी विसंगतियों को जिला स्तर पर भेजने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही सुलझाया जाए।
ये प्रशासनिक कदम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि राज्य में आगामी चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। चुनाव आयोग का ECINet सिस्टम सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए बना है, लेकिन जमीनी स्तर पर मतदाताओं की पहुंच के लिए यह नई मांग एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। फाइनल वोटर लिस्ट 16 नवंबर को जारी की जाएगी, और उससे पहले चुनाव आयोग का इन मांगों पर फैसला ही तय करेगा कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया कितनी आसान होगी।
