महाराष्ट्र साइबर सेल ने एक बड़े डिजिटल अरेस्ट घोटाले को रोक दिया है। दिल्ली की एक महिला से ठगों ने **₹27 लाख** की ठगी कर ली थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता से आगे का बड़ा नुकसान टल गया।
कैसे हुई घोटाले की पहचान?
महाराष्ट्र साइबर पुलिस की टीम छत्रपति संभाजीनगर के ₹3 करोड़ के एक अन्य डिजिटल अरेस्ट मामले की जांच कर रही थी, तभी उन्हें एक संदिग्ध 'म्यूल अकाउंट' का पता चला। इस अकाउंट में लगभग ₹89 लाख की राशि थी। जांच के दौरान, UCO बैंक के माध्यम से RTGS के जरिए ₹14 लाख का एक संदिग्ध ट्रांजैक्शन पकड़ा गया। जब पुलिस ने इस पैसे के सोर्स की जांच की, तो पता चला कि यह पैसा दिल्ली की एक महिला ने दिया था, जिसे ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर फंसाया था।
पुलिस का त्वरित एक्शन
13 अक्टूबर को महाराष्ट्र साइबर ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर तुरंत खुफिया जानकारी साझा की। इस कोऑर्डिनेशन के कारण महिला की बची हुई जमा-पूंजी को लूटने से पहले ही बचा लिया गया। ठग अक्सर वीडियो कॉल पर सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं, जो पूरी तरह से फर्जी होता है।
सुरक्षा के लिए जरूरी टिप्स
भारतीय कानून व्यवस्था में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर पैसों की मांग नहीं करता। साइबर सुरक्षा के जानकारों का कहना है कि:
- किसी भी अनजान कॉल पर घबराएं नहीं और न ही व्यक्तिगत जानकारी साझा करें।
- ऑनलाइन फ्रॉड होने की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
- तुरंत रिपोर्ट करने से पुलिस को फ्रॉड अकाउंट को फ्रीज करने में मदद मिलती है, जिससे आपकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकती है।
