Maharashtra Charity Commissioner ने Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) को गवर्नेंस शिकायतों का जवाब देने के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया है। अब नई डेडलाइन **19 अक्टूबर 2026** है।
विवाद की जड़ और कानूनी प्रक्रिया
Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) को अपनी सफाई पेश करने के लिए अब 19 अक्टूबर 2026 तक का समय मिल गया है। यह जांच ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह द्वारा दायर की गई उन शिकायतों के बाद शुरू हुई है, जिसमें ट्रस्ट के अंदर लीडरशिप और रणनीतिक फैसलों पर सवाल उठाए गए थे।
Tata Sons के लिए क्यों है अहम?
Tata Trusts, Tata Sons में बहुमत हिस्सेदार है। Tata Sons खुद Tata Group की सभी लिस्टेड कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है। ऐसे में ट्रस्ट के भीतर होने वाली कोई भी हलचल ग्रुप की स्थिरता के लिए मायने रखती है। शिकायतकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि क्या हालिया रणनीतिक कदम ट्रस्ट के चैरिटेबल मैंडेट के अनुरूप हैं या वे कमर्शियल मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।
क्या है ट्रस्ट की रणनीति?
किसी भी अचानक या एकतरफा (ex-parte) आदेश से बचने के लिए, Tata Trusts ने रेगुलेटर के सामने कई 'Caveat' दाखिल किए हैं। यह एक कानूनी कदम है ताकि कोई भी आदेश जारी करने से पहले ट्रस्ट को अपनी बात रखने का मौका मिले।
यह पूरा मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मई 2026 में, Charity Commissioner ने Sir Ratan Tata Trust (SRTT) के खिलाफ कुछ प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए थे। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस नई समय सीमा के बाद क्या ट्रस्ट कोई ठोस जवाब दे पाता है और रेगुलेटर का अगला रुख क्या होता है। हालांकि Tata Sons एक लिस्टेड कंपनी नहीं है, लेकिन इस गवर्नेंस विवाद का असर ग्रुप की कई अन्य लिस्टेड कंपनियों के लॉन्ग-टर्म सेंटिमेंट पर पड़ सकता है।
