महाराष्ट्र के BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने भायंदर ईस्ट में स्थित **2,810 वर्ग मीटर** का विवादित प्लॉट छोड़ने का फैसला किया है। 15 साल पुराने इस विवाद का निपटारा PM मोदी से शिकायत के बाद एक उच्च-स्तरीय बैठक में हुआ है।
महाराष्ट्र की सियासत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने नवघर, भायंदर ईस्ट में स्थित 2,810 वर्ग मीटर जमीन का मालिकाना हक असगर अली वोरा को वापस सौंपने पर सहमति जताई है। यह फैसला करीब 15 साल से चली आ रही एक कानूनी और प्रशासनिक खींचतान का अंत है, जिसमें वोरा ने दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप लगाया था।
कैसे सुलझा यह विवाद?
यह समझौता मुंबई के स्टेट सेक्रेटेरिएट में हुई एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग के बाद संभव हुआ। वोरा ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया था, जिसके बाद मामले में तेजी आई। वोरा का दावा था कि उन्होंने यह जमीन 1989 में खरीदी थी, जबकि विधायक से जुड़ी कंपनियां, जैसे Seven Eleven Constructions और Swayam Builders, ने 2011 से वहां निर्माण की अनुमति हासिल कर ली थी। समझौते के तहत, MLA ने अब निर्माण अनुमति वापस लेने और 2015 में वोरा के खिलाफ दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत को भी वापस लेने पर हामी भर दी है।
गवर्नेंस और विवादों का इतिहास
यह मामला भले ही सुलझ गया हो, लेकिन इससे विधायक से जुड़ी कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठे हैं। स्थानीय नगर निगम और राजस्व विभागों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि विधायक नरेंद्र मेहता पहले भी कानूनी विवादों में रहे हैं। 2022 में हाई कोर्ट ने उनके होटल के कुछ अवैध हिस्सों को गिराने का आदेश दिया था। साथ ही, अतीत में उन पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी जांच हो चुकी है।
आगे क्या होगा?
अब प्रशासन का ध्यान बिल्डिंग परमिट को रद्द करने और जमीन के अधिकारों को आधिकारिक रूप से ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पर है। जानकारों का कहना है कि भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नगर निगम के उन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर कंस्ट्रक्शन मंजूरी दी थी।
