महाराष्ट्र कैबिनेट ने कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट में संशोधन कर बड़ी सहकारी संस्थाओं के बोर्ड में सरकार द्वारा नियुक्त सदस्यों को वोटिंग का अधिकार दे दिया है। इसका सीधा असर कोल्हापुर स्थित Gokul Dairy पर पड़ा है, जो इन दिनों बोर्ड चुनाव के गतिरोध (Deadlock) से जूझ रही है।
महाराष्ट्र सरकार ने Maharashtra Cooperative Societies Act, 1960 की धारा 73AAA(2) में बड़ा बदलाव किया है। इस फैसले के तहत, उन सहकारी संस्थाओं के बोर्ड में सरकार 5 डायरेक्टर नियुक्त कर सकेगी जिनका सालाना टर्नओवर ₹500 करोड़ से अधिक है। इसमें बड़ी बात यह है कि इनमें से 4 सरकारी नॉमिनीज को वोटिंग का अधिकार होगा, हालांकि वे चेयरमैन या वाइस-चेयरमैन पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
Gokul Dairy और चुनावी गतिरोध
यह फैसला सीधे तौर पर कोल्हापुर डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन यानी 'Gokul Dairy' को प्रभावित कर रहा है। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Gokul Dairy एक कोऑपरेटिव संस्था है, न कि कोई लिस्टेड कंपनी, इसलिए इसका शेयर बाजार या किसी स्टॉक प्राइस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
फिलहाल, इस डेयरी में बोर्ड गठन को लेकर खींचतान जारी है। हालिया चुनावों में कांग्रेस समर्थित पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीती थीं, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिलीं। कोरम पूरा न होने के कारण चेयरमैन का चुनाव नहीं हो पा रहा है। सरकार के इस कदम को विपक्ष 'डेमोक्रेटिक जनादेश' के साथ छेड़छाड़ बता रहा है, जबकि सरकार का तर्क है कि इससे बोर्ड में प्रोफेशनल एक्सपर्टीज आएगी और काम में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
आगे क्या होगा?
Bombay High Court ने इस मामले में दखल दिया है और 10 नवंबर, 2026 को चेयरमैन चुनने के लिए नई मीटिंग बुलाई है। इस नई कानूनी स्थिति के बाद स्थिति और जटिल हो गई है। डेयरी से जुड़े करीब 5.5 लाख किसानों के लिए मुख्य जोखिम प्रशासनिक अस्थिरता है। भविष्य में इस डेयरी का संचालन किस दिशा में जाएगा, यह कोर्ट के अगले फैसले और इस ऑर्डिनेंस पर होने वाली कानूनी बहस पर निर्भर करेगा।
