मद्रास हाईकोर्ट ने Tiruchirappalli East और तीन अन्य सीटों पर उपचुनाव पर रोक बरकरार रखी है। मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay के इस्तीफे के बाद खाली हुई इन सीटों पर कानूनी पेच फंसा हुआ है।
कानूनी गतिरोध और कोर्ट का रुख
मद्रास हाईकोर्ट ने Tiruchirappalli East निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव की प्रक्रिया पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। कोर्ट के इस फैसले ने Election Commission of India को नई वोटिंग की अधिसूचना जारी करने से रोक दिया है। हालांकि, राज्य के अन्य हिस्सों में 6 अक्टूबर, 2026 को उपचुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गए थे, लेकिन Tiruchirappalli East, Ambasamudram, Viralimalai और Karur जैसे निर्वाचन क्षेत्र अभी भी बिना किसी विधायी प्रतिनिधि के हैं।
मामला क्या है?
पूरा विवाद एक 'पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' (PIL) के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिसमें इन क्षेत्रों के मूल चुनावी नतीजों की वैधता को चुनौती दी गई है। कोर्ट के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या मूल चुनाव परिणामों पर चल रहे विवादों के बीच नए चुनाव कराना कानूनी रूप से उचित है? जजों का मानना है कि यदि मूल परिणाम बाद में अमान्य घोषित किए जाते हैं, तो यह एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा कर सकता है, जहाँ एक ही सीट पर दो अलग-अलग दावेदार सामने आ सकते हैं।
मुख्यमंत्री का इस्तीफा और प्रशासनिक असर
यह प्रशासनिक शून्यता मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay के इस्तीफे के बाद आई है। उन्होंने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें से उन्होंने Perambur को अपने पास रखा और Tiruchirappalli East को खाली कर दिया। अब Tamilaga Vettri Kazhagam ने कोर्ट से इस रोक को हटाने की मांग की है ताकि जनता को उनका प्रतिनिधि मिल सके।
कोर्ट ने इस मामले में 1 अक्टूबर, 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब सभी की निगाहें अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इन क्षेत्रों में चुनाव होंगे या कानूनी चुनौतियों के समाधान तक ये सीटें खाली रहेंगी।
