Madras High Court का बड़ा फैसला, MK Stalin की याचिका खारिज, V.S. Babu की जीत पर मुहर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Madras High Court का बड़ा फैसला, MK Stalin की याचिका खारिज, V.S. Babu की जीत पर मुहर

मद्रास हाईकोर्ट ने कोलाथुर विधानसभा सीट से 2026 के चुनावी नतीजों को चुनौती देने वाली DMK नेता MK Stalin की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे 'नॉन-मेंटेनेबल' करार दिया, जिससे TVK उम्मीदवार V.S. Babu की जीत की पुष्टि हो गई है।

गुरुवार को मद्रास हाईकोर्ट ने कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणामों के खिलाफ DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री MK Stalin द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस और जस्टिस G. Arul Murugan की बेंच ने साफ तौर पर कहा कि यह याचिका कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है, जिसके चलते TVK उम्मीदवार V.S. Babu की जीत को कानूनी तौर पर मान्यता मिल गई है।

चुनावी हार और कानूनी विवाद

यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जहां MK Stalin को 8,795 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव नतीजों के बाद, DMK नेता ने इलेक्शन प्रोसेस पर सवाल उठाते हुए कोर्ट का रुख किया था। याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की चेन ऑफ कस्टडी, VVPAT स्लिप्स में विसंगतियों और वेरिफिकेशन प्रोसेस में देरी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

कोर्ट का फैसला पूरी तरह से संवैधानिक और प्रक्रियात्मक कानूनों पर आधारित है। बेंच ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की दलील को सही माना कि चुनाव संबंधी विवाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 329(b) और Representation of the People Act, 1951 के तहत आते हैं। कानून के मुताबिक, चुनावी नतीजों को चुनौती देने के लिए केवल औपचारिक 'इलेक्शन पिटीशन' ही दायर की जा सकती है, न कि रिट याचिका। उचित वैधानिक रास्ता न अपनाने के कारण कोर्ट ने इस चुनौती को आगे बढ़ने से रोक दिया।

राजनीतिक स्थिरता और मार्केट का नजरिया

तमिलनाडु के राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल पर नजर रखने वाले जानकारों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है। किसी भी राज्य में चुनावी प्रक्रिया का स्पष्ट और विवाद-मुक्त होना वहां की राजनीतिक स्थिरता के लिए जरूरी माना जाता है। हालांकि इस याचिका को खारिज कर दिया गया है, लेकिन EVM प्रोटोकॉल और चुनावी प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक बहस जारी है। मार्केट पर नजर रखने वाले निवेशक और विश्लेषक इस तरह के घटनाक्रमों को राज्य के विधायी और प्रशासनिक माहौल के नजरिए से ट्रैक करते हैं, जो लंबे समय में नीतिगत निरंतरता को प्रभावित कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.